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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Luke 12
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
इथग मा जब हजारों कि भीड़ लगि गै इख तक कि एक दुसरा पर गिरदा पड़दा छा त उ सबसे पैली अपड़ा चेलों मा बुल्ण लगि गै कि देखा तुम फरीसियों का कपटरूपी खमीर से सचेत रावा।”
2
इन ही जु कुछ छिपयूं च प्रगट हवे जौं अर हर गुप्त बात प्रगट हवे जौ।
3
इलै जु कुछ भि मि अंधेरा मा बुल्दो छौं वे तैं चेला सभियूं का संमणी बगैर कै डौरा का बोल सकदींनि।
4
मेरा दगड़ियों, मेरी सूंणा, ऊं बट्टी डरयां न जु देह तैं नशा करदींनि, पर वेका बाद वे बट्टी जादा अर कुछ नि नाश कैरी सकदो च।
5
मि तुम तैं चितौंदु कि तुम तैं कै बट्टी डरण चयणु च घात कना का बाद जै तैं नरक मा डलणो कु अधिकार च वे बट्टी ही डैरा बल्कि मा मि तुम मा बुल्णु छौं वे ही बट्टी डैरा।
6
क्य द्वी पैसा मा पाँच घींडुडी नि बिकद? फिर भि परमेश्वर ऊंमा बट्टी एक तैं भि नि भुलदो।
7
उ यु भि जंणदु च की तुमारा मुंड मा कथग बाल छिनी। इलै डैरा न किलैकि तुम भौत घींडुडी से भि बढ़ि के छा।
8
मि तुम मा बुल्णु छौं जु कुई भि लुखुं का संमणी इन बोलो, कि मि यीशु कु चेला छों, त मि मनिख कु नौंनो वे तैं परमेश्वर का स्वर्गदूतों का संमणी स्वीकार करलो।
9
पर जु कुई लुखुं का संमणी मेरू इन्कार करलो त मि मनिख कु नौंनो वे तैं परमेश्वर का स्वर्गदूतों का संमणी स्वीकार नि करलो।
10
जु कुई मि मनिख कु नौंनो का बारा मा बुरै करलो, वेका पाप त माफ किये जाला, पर जु पवित्र आत्मा की निंदा करलो, वेको अपराध माफ नि किये जालो।
11
जब लोग तुम तैं पकड़ी के यहूदियों का मिलणा का भवन मा ली जाला अर तुम तैं आधिकारियों मा सौंपला त तुम फिकर नि करयां कि हम ल क्य अपड़ा बचाओ मा बुल्ण, तुम ल की जवाब दींण या की बुल्ण।
12
किलैकि पवित्र आत्मा वे बगत तुम तैं सिखालो की तुम तैं क्य बुल्ण चयणु च।
13
फिर भीड़ मा बट्टी एक ल यीशु बट्टी बोलि, हे गुरु मेरा भैय बट्टी बोल कि पिता कि सम्पति मि तैं बांटि दे।
14
यीशु ल वे बट्टी बोलि, हे मनिख कैल मि तैं तुमारो न्यायी या बंटण वलो ठैरे?
15
अर यीशु ल ऊं बट्टी बोलि सचेत रावा अर हर प्रकार का लोभ बट्टी अफ तैं बचै के रखा किलैकि कै को जीवन वेकी सम्पति की बहुतायत बट्टी नि हूंद।
16
यीशु ल ऊं तैं एक मिसाल सुंणै कि कै धनवान कि खेती मा भौत जादा फसल हवे।
17
तब उ अपड़ा मन मा सुचण लगि गै कि मि तैं नि पता की क्य कन चयणु च किलैकि मि मा अपड़ी सैरी फसलों तैं जमा कैरी के रखणै की इदगा बड़ी जगह भि नि च।
18
अर वेल बोलि मि तैं पता च की मि तैं क्य कन चयणु मि अपड़ा ग्यूं का बीज का गोदामों तैं तोड़ी के ऊं बट्टी भि बड़ा बणौलु
19
यांका बाद अपड़ा आप तैं बुललु, कि त्वे मा भौत बरसों कु भौत सम्पति रखिं च विश्राम कैर, खा, पी, सुख से रै।
20
पर परमेश्वर ल वे बट्टी बोलि, हे मूर्ख! आज रात तिल मौर जांण, त ऊं चीजों तैं कैल लींण जु तिल अफ कु कठ्ठा कैरी छो?
21
इन ही वे आदिम का दगड़ी होलो जु सब कुछ अफ कु कठ्ठा करदो अर जु अफ कु धन बटोरदु च पर परमेश्वर कि सेवा कनु कु अपड़ी तागत अर धन कु इस्तेमाल नि करदो।
22
फिर वेल अपड़ा चेलों बट्टी बोलि, इलै मि तुम मा बुल्णु छौं, कि हरेक रोज यु चिंता नि करयां कि हम क्य खौला अर न अपड़ा देह कि क्य पैरुला क्य प्राण खांणु से अर देह कपड़ोंं से बढ़ि के नि च?
23
किलैकि खांणु से प्राण अर कपड़ोंं से देह बढ़ि के च।
24
चलखुडों तैं देखा उ न त बुतदा छिनी अर न लवैइ करदींनि अर न अपड़ा खत्तों मा बटोरदिन फिर भि तुमारो स्वर्गीय पिता परमेश्वर ऊं तैं खिलांदु तुम निश्चित रुप मा चलखुडों का तुलना मा भौत जादा मूल्यवान छा।
25
तुम मा बट्टी कु च जु चिंता कैरी कै अपड़ा जीवन मा एक घड़ी भि बढ़ै सकद?
26
इलै जब तुम सबसे छुटो काम भि नि कैरी सकदां त जीवन मा और बातों का बारा मा चिंता किलै करदां?
27
जंगली फूलों पर ध्यान कैरा कि उ कन कै बड़दिन उ न त मेहनत करदींनि न कपड़ा बंणौंदींनि। तब भि मि तुम मा बुल्ण छौं कि राजा सुलैमान भि अपड़ी सैरी धन दौलत मा बट्टी वे जन कपड़ा पैरदो नि छो।
28
इलै मैदान कि घास तैं, जु आज च, अर भोल आग मा जलै जाली, फिर भि परमेश्वर ल ऊं तैं इथग जादा सुन्दरता दींनि, त हे अल्पविश्वासियों, जरुर तुम्हरी भि देखभाल करलो।
29
अर तुम ईं बात कि खोज मा नि रावा कि क्य खौला, य क्य प्यूला, अर न सन्देह कैरा।
30
दुनिया कि अन्यजातियों जु परमेश्वर तैं नि जणदींनि सभि चीजों कि खोज मा रौदींनि पर तुमारो स्वर्गीय बुबा जंणदु च कि तुम तैं यूं सभि चीजों कि जरूरत च।
31
इलै पैली तुम परमेश्वर का राज्य अर धर्म कि खोज कैरा त यु सभि चीज भि तुम तैं मिली जालि।
32
तुम मेरी देखभाल मा ढिबरों का जन छा इलै के भि बात का बारा मा नि डैरा, किलैकि तुमारा पिता परमेश्वर तैं यांकि खुशी च, की तुम तैं राज्य द्यो।
33
अपड़ी संपत्ति बचै के दान कैरी दे अर अफ कु इन बटुवा बंणौ, जु पुराणो नि हूंद, पर भलै कैरी के स्वर्ग मा अफ कु धन कठ्ठा कैरा जु घटदो नि च, जैका संमणी चोर नि औंदु, अर कीड़ो नि बिगड़दो।
34
किलैकि तेरु मन हमेशा उखि लग्युं रालो जख तेरु धन च।
35
हमेशा सेवा कनु कु तैयार रावा अर सैरी रात तुमारा दिवडा जल्यां रो।
36
अर तुम ऊं मनिख्युं जन बणा जु अपड़ा स्वामि तैं जुगाल कि उ ब्यो बट्टी कब लौटलो कि जब उ ऐ के दरवजो खटखटालो त तुरंत खोले जालो।
37
धन्य च उ दास जौं तैं स्वामी ऐ के ऊंका वापिस आणौं कु जुगाल करद हो मि तुम मा सच बुल्णु छौं, कि एक सेवक का जन कपड़ा पैनिकै ऊं तैं खांणु खाणों कु बैठालो अर संमणी ऐ के वेकी सेवा करलो।
38
इलै उ अधा राती या सुबेर मा ऐ के ऊं तैं बिज्यूं पालो त उ दास धन्य च।
39
पर तुम यु जणिल्या कि जै घौर कु स्वामि जांणि जांदु कि चोर कै बगत आलो त बिज्यूं रौंद अर अपड़ा घौर मा चोरी नि हूंण दींदो।
40
तुम मेरा लौटण कु तैयार रावा किलैकि मि मनिख कु नौंनो जै बगत पर स्वर्ग बट्टी आलो जब तुम मेरा आंणै की भि उम्मीद नि करदा होला किलैकि वीं बगत तुम सुचदा भि नि होला।
41
तब पतरस ल बोलि, हे प्रभु क्य यु मिसाल तु हम मा या सभियूं मा बुलद्यां।
42
प्रभु ल बोलि, उ भरोसो का लैख अर बुद्धिमान सेवक कु च जै तैं स्वामि ल अपड़ा नौकर-चाकरों पर मुखिया ठैरे कि बगत पर ऊं तैं खांणु द्यो?
43
धन्य च उ सेवक जै तैं वेकु स्वामी ऐ के इन ही करद देखु।
44
मि तुम मा सच बुल्णु छौं उ वे तैं अपड़ी सैरी सम्पति पर अधिकारी बंणालु।
45
पर जु दुष्ट सेवक सुचण लगि जौं कि मेरा स्वामि का औंण मा देर च अर अफ दगड़िया सेवकों तैं पिटण लगि जौं अर पियक्कड़ु का दगड़ा मा खौ-प्यो।
46
त वे सेवक को स्वामी इन दिन मा वापिस आलो जब उ वे तैं नि जुगल्णु रालो अर इन बगत मा जै तैं उन ही जंणदु हो तब उ वे तैं भौत कड़ी सजा दयालो अर वेको भाग ढोंगि लुखुं का दगड़ा मा ठैरालो उख रूण अर दांतों को पिसंण होलो।
47
अर उ सेवक जु अपड़ा स्वामि कि मनसा जंणदु छै पर जैल तैयार हवे के वेकी मनसा का अनुसार काम नि कैरी उ भौत कोड़ा खालो।
48
पर जु बेसुद मा मार खांण लैख काम करलो उ जरा सी मार खालो इलै जै तैं भौत दिये गै वे बट्टी भौत मंगे जालो अर जै मा भौत सौंप्युं च वे बट्टी भौत मंगे जालो।
49
मि धरती मा आग लगांणु कु अयुं छौं अर क्य चांदु की या अभि सुलगी जौ।
50
मिल जल्द ही भयंकर पिड़ा तैं झिलण अर जब तक उ पिड़ा न हो तब तक मि भौत बेचैन छों?
51
क्य तुम समझदां कि मि धरती पर लुखुं का बीच मा शान्ति लांणु कु अयुं छौं, मि लुखुं का बीच मा शान्ति न बल्कि लड़ै करवांणु कु अयुं छौं।
52
किलैकि अब बट्टी एक घौर मा पाँच लोग हो त उ आपस मा बंटे हो, तीन लोग जु मि पर विश्वास नि करदा, उ द्वी लुखुं का विरोध करदींनि जु मि पर विश्वास करदा छिन द्वी, तीन भि हो।
53
बुबा नौंना से अर नौंना बुबा बट्टी विरोध रखला ब्वे नौंनि अर नौंनि ब्वे बट्टी, सास ब्वारि बट्टी अर ब्वारि सास बट्टी विरोध रखली।
54
वेल भीड़ बट्टी बोलि, जब तुम बादल तैं पश्चिम बट्टी उठदा दिखदा छा, त तुरंत बुल्दा की बरखा होलि, अर इन ही हूंद।
55
अर जब दक्षिणी बथौं चलदी दिखदा त बुल्दा की लूह चललि अर इन ही हूंद।
56
हे कपटियों तुम धरती अर आसमान का लक्षण देखि के वेको भेद बतै सकदा पर ये युग मा परमेश्वर की कनु च वेका बारा मा भेद किलै नि जंणदा?
57
तुम तैं अफी ही फैसला कन चयणु की तुम कु की कन ठिक च?
58
जब तु अपड़ा मदद का दगड़ा राज्यपाल मा जांणि रैलि त बट्टा मा वे बट्टी छुटणौ ब्यूंत कैर कखी इन नि हो कि न्यायी त्वे तैं राज्यपाल तैं सौंपु अर राज्यपाल त्वे तैं सिपैयूं मा सौंपी दयूंनु अर तु बन्दीगृह मा डले जौ।
59
मि तुम मा सच बुल्णु छो कि जब तक तुम उ सब कु भुगतान नि कैरी दयाला, जु तुम पर बकाया च, तब तक तुम बन्दीगृह बट्टी कभी नि छुटण पैली।
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