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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Luke 17
Luke 17
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
फिर वेल अपड़ा चेलों मा बोलि, यु बात पक्की च अजमैश मनिख्युं मा जरुर आली जु ऊंको पाप का कारण बंणलि पर हाय वे मनिख पर जैका कारण उ आली।
2
जु कुई यूं छुटों मा बट्टी जु मि पर विश्वास करदींनि ऊं तैं उतेडो लगौ त वेको त यु भलो च कि उ अपड़ा गौळा मा जंदरा को पाट लटकाये जौं अर उ समुद्र मा डाले जौं।
3
सावधान रावा की तु क्य कनि छैं जु तेरा विश्वासी भैय ल अपराध कैर त वे तैं डांट अर जु उ पछतौ त वे तैं माफ कैर।
4
जु दिन भर मा उ सात बार भि अपराध अर सातों बार त्वे मा फिर ऐ के बोलु कै पछतांणु च त वे तैं माफ कैर।
5
तब प्रेरितों ल प्रभु यीशु मा बोलि हमारो विश्वास तैं और मजबूत कैर
6
मि तुम मा सच-सच बुल्णु छौं जु कुई यु डांडा कु बुललो तु उखड़ि जा अर समुद्र मा पोड़ि जा अर अपड़ा मन मा शंका नि कैर बल्कि भरोसो कैर कि जु बुल्णु छौं उ हवे जालो त वेको उन ही हवे जालो।
7
जु तुमारा नौकर पुंगडा मा हौल लगै के या ढिबरों की देख रेख कैरी के घौर ऐ त क्य तुम बुल्या, तुरंत औ अर खांणु खांण बैठ?
8
न बल्कि उ बुलालो कि “मेरू खांणु बणौ अर जब तक मि खौलु प्यूलु तब तक मेरी सेवा कनु कु तैयार हवे जा।”
9
क्य उ वे नौकर को एहसान मानलु कि वेल उ ही काम करिनी ज्यां कि वे तैं आज्ञा दीं छै?
10
वे रीति से जब तुम ल उ सब कुछ कैरी याली जु तुम तैं कनु कु बुलै गै छो त तुम तैं यु बुल्ण चयणु च, हम निकम्मा दास छा की जु हम तैं कन चयणु च उ ही करयूं च।
11
जब यीशु अर वेका चेला यरूशलेम शहर की तरपां जांण वला रस्ता पर जांणा छा सामरिया प्रान्त अर गलील जिला का सीमा मा हवे के जांणु छो।
12
कै गौं मा जांदी बगत ऊं तैं दस कोढ़ी मिलिनि।
13
ऊंल दूर खड़ो हवे के धै लगै के बोलि, “हे यीशु हे स्वामि हम पर दया कैरा”
14
यीशु ल ऊं तैं देखि के बोलि, “जावा अर अफ तैं यहूदी याजक तैं दिखावा की तुम खूब हवे गै छा, अर उ जांदु ही खूब हवे गैनी। ”
15
तब ऊंमा बट्टी एक ल देखि कि मि खूब हवे गौं जोर से चिल्लै कै परमेश्वर कि बढ़ै कैरी के यीशु मा वापिस ऐ
16
अर यीशु का खुट्टों मा पोड़ि के धन्यवाद कन लगि गै अर यु आदिम सामरी जाति कु छो।
17
यां पर यीशु ल बोलि, “क्य दसों आदिम खूब नि हवे छा त फिर उ नौं कख गैनी?”
18
क्य यु गैर यहूदी तैं छोड़ी के और कुई नि निकली जु परमेश्वर की बढ़ै करदो?
19
तब यीशु ल वेकु बोलि, “उठि के चलि जा किलैकि तिल विश्वास कैरी इलै तु बचै गै।”
20
जब फरीसियों ल वेमा पूछि, कि परमेश्वर का राज्य ल कब आंण अर वेको क्य चिन्ह च त वेल ऊं तैं जवाब दे “परमेश्वर को राज्य दिख्योंदु नि च।”
21
अर लोग इन नि बुलला “देखा इख च या उख च। किलैकि देखा परमेश्वर कु राज्य तुमारा बीच मा च।”
22
फिर वेल चेलों कु बोलि, “उ दिन आला जौं मा तुम मि मनिख का नौंनो का दिनों मा बट्टी एक दिन तैं दिखण चैल्या अर नि देखि सकिल्या।”
23
लोग तुम मा बुलला “देखा मसीह उख च! देखा इख च! पर तुम चलि जयां अर ऊंकु पीछा नि करयां।”
24
किलैकि जन बिजली आसमान मा पूरब बट्टी पश्चिम तक चमकदी उन ही मि मनिख कु नौंनो कु औंण भि होलो।
25
पर पैली जरूरी च कि भौत जादा दुख उठै, अर ईं पीढ़ी का लोग वे तैं तुच्छ ठैराला।
26
जन पूर्वज नूह का दिन मा छा उन ही मि मनिख कु नौंनो को औंण भि होलो।
27
जै दिन तक कि नूह जहाज पर नि चैड़ि छो वे दिन तक लोग खांदा पींदा छा अर ऊंमा ब्यो-पग्नि हूंदी छा तब जल प्रलै ल ऐ के ऊं सभियूं तैं नाश कैरी दींनि।
28
अर उ जन हमारा पूर्वज लूत, जु सदोम शहर मा रौंदु छो कि लोग खांदा पींदा लेन देन करदां डाला लगांदा अर घौर बणांदा छा
29
पर जै दिन लूत सदोम बट्टी निकली वे दिन स्वर्ग बट्टी आग अर गंधक बरसि अर सब लोग जु शहर मा छा नाश कैरी दींनि।
30
अर वे दिन भि यु जन होलो जब मि मनिख कु नौंनो को अचानक से दुबारा वापिस आलो।
31
जु छत पर हूंनु उ अपड़ा घौर बट्टी कुछ समान लींणु कु मूड़ी घौर का भितर नि उतरुनु, अर जु पुंगड़ा मा हो उ अपड़ा कपड़ा लींणु कु घौर कु पिछनै नि लौटु।
32
हमारा पूर्वज लूत कि जनन तैं याद कैरा की वेकी जनन दगड़ी की हवे छो
33
किलैकि जु कुई अपड़ो जीवन बचौण चौ उ वे तैं गवांलू पर जु कुई मेरा बाना अर शुभ सन्देश का बाना अपड़ा आत्मा तैं गवांलू उ अनन्त जीवन तैं पालो।
34
मि तुम मा बुल्णु छौं वीं राती द्वी मनिख एक खाटि मा होला ऊंमा बट्टी एक लिये जालो अर हैंको छुड़े जालो।
35
द्वी जनन जंदरु पिसंणि राली ऊंमा बट्टी एक लिये जालि अर हैंकी छुड़े जालि।
36
द्वी आदिम पुंगड़ा मा होला त एक लिये जालो अर हैंको छोड़े जालो।
37
यु सूंणि कै ऊंल वेमा पूछि, “हे प्रभु यु कख हूंण? वेल ऊंमा बोलि, सभि तैं पता चलि जालि की इन कख हूंणु जन कि सभि तैं पता च जख शव हूंदु, उखि गरुड़ कठ्ठा हवाला।”
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