bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
Luke 19
Luke 19
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 18
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 20 →
1
यीशु यरीहो शहर मा प्रवेश कैरी कै जांणु छो।
2
उख जक्कई नौं कु एक आदिम रौंदु छो। जु चुँगी लींण वलो को मुखिया छो अर भौत सेठ छो।
3
उ यीशु तैं दिखण चांदु छो कि उ कन च? पर भीड़ का कारण देखि नि सकदु छो किलैकि उ छुटो कद कु आदिम छो।
4
तब वे तैं दिखणु कु उ अगनैं दौड़ि के एक गूलर का डाला मा चड़िगे किलैकि यीशु वे बट्टा बट्टी जांण वलो छो।
5
जब यीशु वीं जगह पर पौंछि जख जक्कई छो यीशु ल मथि नजर कैरी कै वेको बोलि, “हे जक्कई झट भुयां उतरी के औ किलैकि आज मिल तेरा घौर मा रौण जरूरी च।”
6
उ जल्दी डाला बट्टी भुयां उतरी अर यीशु तैं अपड़ा घौर ली गै अर आनन्द से वेको स्वागत कैरी।
7
यु देखि के लोग बबड़ट कन लगि गैनी “यीशु त एक पापी मनिख का घौर चलि गै।”
8
जक्कई ल खांणा का बगत उठ खड़ो हवे के प्रभु यीशु मा बोलि, “हे प्रभु देख मि अपड़ा अधा सम्पत्ति कंगालों तैं दे दींदु त जु मिल लुखुं बट्टी अन्याय कैरी के लियुं च त मि वे तैं चार गुणा लौटे दयुलु।”
9
तब यीशु ल वेकु बोलि, “आज यु घौर मा उद्धार ऐ गै इलै कि यु भि अब्राहम कु वंशज च।”
10
किलैकि मि मनिख कु नौंनो हरच्यां लुखुं तैं खुज्योंणु कु अर ऊं तैं बचौणु कु अयुं छों।
11
जब लोग यूं बातों तैं सुनणा छा त तब यीशु ल अपड़ी बात जारी रखि अर वेल एक मिसाल दींनि अब उ यरूशलेम शहर का नजीक छा अर लुखुं तैं लगि कि परमेश्वर कु राज्य भस आंण वलो च।
12
त वेल बोलि, “एक धनवान मनिख दूर देश चलि गै कि उख वे तैं राजपद पै के लौटि के ऐ जौं।”
13
वेल अपड़ा नौकरों मा बट्टी दस नौकरों तैं अफ मा बुलै ऊं तैं तीन मैना की मजदूरी दीं छै, अर ऊंकु बोलि, मेरा लौटण तक लींण दींण करयां।
14
पर वेका शहर का रांण वला वे बट्टी दुश्मनी रखदा छा अर वेका पीठ पिछनै दूतों मा रैबार भेजि कि हम नि चांदा कि यु हम पर राज्य कैर।
15
जब उ बड़ो ओहदा पै के लौटि त इन हवे कि वेल तीन मैना की मजदूरी दीं छै अफ मा बुलै कि पता कैर कि ऊंल लींण दींण कैरी के क्य कमै।
16
तब पैला ल ऐ के बोलि, “हे स्वामि तेरु चांदी को मोहर ल मिल दस और चांदी कु मोहर कमै।”
17
वेल वेकु बोलि, “साबास भला सेवक तु भौत कम मा भि भरोसो बंद निकली अब दस शहरों पर हक जमौ।”
18
दुसरा ल ऐ के बोलि, “हे स्वामि तेरा चांदी कु मोहर ल मिल पाँच और चांदी को मोहर कमै।”
19
वेल वेकु बोलि “तू भि पाँच शहरों कु अधिकारी बंणि जा।”
20
तिसरा ल ऐ के बोलि, “हे स्वामि देखा तेरा चांदी कु मोहर यु च जु मेरू सांफा पर बांधि के रख्युं छो।”
21
किलैकि मि त्वे बट्टी डरदु छो किलैकि तुम सख्त आदिम छै तु जु नि रखदि वे तैं उठांदी छै अर जु बुतदी नि छै वे तैं कटदी छै।
22
मालिक ल वेकु बोलि, “हे दुष्ट सेवक मि तेरा मुके की बातों ल त्वे तैं भंगारी ठैरांदु, जब तु मि तैं जंणदी छै कि मि सख्त मनिख छौं जु मिल नि रखि वे तैं उठांदु छौं अर जु मिल नि बूति वे तैं लौंदु छौं।”
23
त फिर तिल मेरू रुप्या सुनारु मा किलै रखि मि ऐ के अपड़ा धन तैं ब्याज समेत ले लींदु।
24
अर जु लोग नजीक खड़ा छा मालिक ल ऊंकु बोलि, “वे चांदी कु मोहर तैं वे बट्टी ले ल्या अर जै मा दस चांदी को मोहर छिन वे तैं दे द्यावा।”
25
मालिक ल ऊंमा बोलि, “हे स्वामि वेमा दस चांदी कु सिक्का छिन।”
26
मालिक ल ऊंमा बोलि, मि तुम मा बुल्णु छौं कि किलैकि जै मा थोड़ी भि मेरी बातों तैं समझणु की समझ छैं च वे तैं और दिये जालि पर वे तैं भि जु मा थोड़ा च वे बट्टी लिये जालो।
27
पर मेरा ऊं बैरियों तैं जु नि चांदा छा कि मि राजा बणु ऊं तैं इख मेरा संमणी लावा अर खत्म कैरा।
28
यूं बातों तैं बोलि, के यीशु यरूशलेम शहर की तरपां अपड़ा चेलों का दगड़ी अगनैं-अगनैं हिटी।
29
जब उ जैतून डाला का डांडा का किनारा पर बैतफगै अर बैतनिय्याह का गौं मा ऐ, त वेल अपड़ा चेलों मा बट्टी द्वी चेलों तैं इन बोलि के भेजि
30
“संमणी का गौं मा जावा अर उख पौंछि के तुम तैं एक गधा कु बच्चा जै पर अभि तक कैल भि सवारी नि कैरी हो तुम तैं बंधयूं मिललो वे तैं खोलि के इनै ल्यावा।”
31
जु तुम मा कुई भि कुछ पूछो कि इन किलै कना छा? त हमारा प्रभु तैं यु कि जरुरत च।
32
जु भिजे गै छा ऊंल जै के उन ही कैरी जन-जन वेल ऊंकु बुल्युं छो उन ही पै।
33
जब उ गधा का बच्चा तैं खुलणां छा त वेका मालिक ल ऊं तैं पूछि, “यु बच्चा तैं किलै खुलणां छा”
34
ऊंल बोलि, “प्रभु तैं ये कि जरुरत च।”
35
उ गधा कु बच्चा तैं यीशु मा लै के ऐनी अर वे पर अपड़ा भैरा का कपड़ा डलिनि अर यीशु तैं वे पर बैठै दींनि।
36
जब गधा कु बच्चा बैठी कै जांणु छो त लुखुं ल अपड़ा कपड़ा बट्टा मा बिछांदि जांणा छा।
37
जब यीशु वीं जगह का ढलान पै पौंछि जख बट्टी रस्ता यरूशलेम शहर का जैतून डाला का डांडा बट्टी कि उंदार मा जान्दो च चेलों कि सैरी मण्डलि ऊं सभि चमत्कार का कामों का खतिर जु ऊंल देखि छा खुश हवे के जोर कि आवाज मा परमेश्वर कु गुणगान कन लगि गैनी।
38
“धन्य च उ राजा जु परमेश्वर की सामर्थ से औंदु स्वर्ग मा शान्ति अर आकाश मा बढ़ै हो।”
39
तब भीड़ मा बट्टी कुछ फरीसी वेमा बुल्ण लगि गैनी “हे गुरु अपड़ा चेलों तैं डांट।”
40
वेल जवाब दींनि “मि तुम मा बुल्णु छौं कि जु उ लोग चुप राला त ढुंगा चिल्लांण लगि जाला।”
41
जब यीशु नजीक ऐ त यरूशलेम शहर तैं देखि के रूण लगि गै।
42
अर बोलि, “तुम कु कथग भलो हूंद, कि तु, हां, तू ही, ये दिन परमेश्वर जु शान्ति दींदी की उ तेरी आँखों बट्टी लुकि रौंदी।
43
किलैकि ऊं दिनों ल त्वे पर बैरी आला तुमारा चौतरफी बैरियों तैं खड़ा करला अर चौतरफी बट्टी त्वे तैं दबाला।
44
तेरु बैरी त्वे तैं पूरा ढंग से नष्ट कैरी दयाला अर तेरु पूरो शहर का लुखुं तैं माटा मा मिलै दयाला अर तेरा ढुंगा मा ढुंगा भि नि राला जु ढोळे नि जालो किलैकि तिल वे मौका तैं जब त्वे पर कृपा की नजर करे गै छै नि पछयांणी।”
45
तब उ यरूशलेम शहर का मन्दिर मा जै के व्यापारियों तैं भैर निकलण लगि गै।
46
अर यीशु ल ऊंकु बोलि, “परमेश्वर का वचन मा लिख्युं च कि मेरू घौर परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कु मन्दिर होलो? पर तुम ल ये तैं डकैतों कु उडयार बणैयेलि।”
47
उ हमेशा यरूशलेम शहर का मन्दिर मा उपदेश दींदु छो, अर प्रधान याजक अर मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वला अर लुखुं का मुखिया यीशु तैं नाश कनु कु मौका खुज्योंण लगि गैनी।
48
पर कुई ब्यूंत नि कैरी सकिनि कि यु कनके करुला किलैकि लोग बड़ी चाह से वेकी सुणदा छा।
← Chapter 18
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 20 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24