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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Matthew 13
Matthew 13
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
वे दिन यीशु घौर बट्टी निकली के झील का छाला मा बैठी गै।
2
अर वेका संमणी इथग बड़ी भीड़ जमा हवे गै कि यीशु एक नाव पर चढ़ी के बैठी गै अर सैरी भीड़ झील का छाला पर खड़ी रै।
3
अर वेल ऊं दगड़ी मिसाल दे के भौत सी बात करिनी एक बुतै कन वलो बीज बुतुणु कु अपड़ा पुंगडा मा गै।
4
अर बुतुण बगत कुछ बीज त बट्टा का किनारा पर छिलरेनी अर आकाश का चलखुडों ल ऐ के ऊं बीजों तैं खै दींनि।
5
अर कुछ बीज पथरीली भूमि पर छिलरेनी जख ऊं तैं जादा माटो नि मिली अर गैहरु माटो नि मिलणा वजह से जल्दी जमि गैनी।
6
अर जब घाम निकली त वे फुके गैनी अर जौड़ा कमजोर हूंण का कारण जल्दी सूखि गैनी।
7
कुछ झिबलांण मा छिलारेनी अर जख झिबलाड़न ल बढ़ि के ऊं तैं दबै दींनि।
8
पर कुछ बीज अच्छी भूमि मा पोड़िन अर फल लैंनि कुई सौ गुणा कुई साठ गुणा अर कुई तीस गुणा।
9
अर वेल बोलि जु कुई ईं बात तैं सूंणि सकदु जु मि बुल्ण छौं उ यु तैं समझ भि ल्यो।
10
अर चेलों ल संमणी ऐ के ऊंमा बोलि, “तु लुखुं तैं दगड़ी मिसाल दे के किलै बात कनी छै”
11
यीशु ल जवाब दींनि, “तुम तैं त परमेश्वर का राज्य कि सचै की समझ दियीं च पर ऊं तैं नि दिईं।”
12
किलैकि जै मा थोड़ी भि मेरी बातों तैं समझणै की इच्छा छैं च वे तैं और दिये जालि अर वेमा भौत हवे जलो पर जै मा थोड़ा भि नि च वेमा बट्टी उ भि लिये जालि जु वेमा छैं च।
13
मि ऊं दगड़ी मिसाल दे के इलै बात करदु किलैकि उ देखि के दिखुनु पर ऊं तैं पछांण नि सकदा अर सूंणि के भि सुणुनु पर समझ भि नि सकुनु।
14
ऊंका बारा मा यशायाह कि य भविष्यवाणि पूरी हूंदी तुम कंदूड़ों त सुंणिल्या पर नि समझिल्या अर आँखों ल त देखि ल्या पर तुम नि पैछाणिल्या।
15
किलैकि यूं लुखुं का दिल जिद्दी हवे गैनी, अर उ कंदूड़ों ल ऊंचो सुणदींनि अर ऊंल अपड़ा आंखा बूजिनि कखि इन नि हो कि उ आँखों ल दिखुनु, अर कंदूड़ों ल सुंणुनु अर मन से समझण, अर अपड़ा पापों से मन फिरौनु अर मि ऊं तैं खूब कैरु।
16
पर धन्य छिन तुमारा आंखा कि उ दिखदा छिन अर तुमारा कंदूड़ कि उ सुंणदा छिनी।
17
किलैकि मि तुम मा सच बुल्णु छौं किलैकि कथग ही परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो ल अर धर्मियों ल चै कि जौं बातों तैं तुम दिखणा छा देखा पर नि देखि अर जौं बातों तैं तुम सुनणा छा सुनणु पर नि सुंणिनि।
18
अब तुम बीज बुतंण वला मिसाल कु मतलब सूंणा
19
जु कुई परमेश्वर को वचन सूंणि के नि संमझुदो वेका मन मा जु कुछ बुतै गै छो वे तैं उ दुष्ट शैतान ऐ के लूछि के लिजांदु यु उ ही च जु बट्टा किनारा बुतै गै छो।
20
कुछ लोग वीं पथरीली भूमि जन छिन ज्यां पर बीज गिरदो पर यु उ छिनी कि जु वचन तैं सूंणि के वे बगत खुशी से स्वीकार कैरी दे दींनि।
21
पर अफ मा जौड़ा नि रखणा वजह से उ कुछ ही दिनों कु रांदो यांका बाद जब ऊं पर क्लेश या बिपदा औंदि त तब उ तुरंत ठोकर खै दींनि।
22
जु झिबलांण मा बुतै गैनी उ यु छिनी जौं ल वचन तैं सूंणि, पर धरती पर जीवन कि चिंता अर धन दौलत को धोखा ज्यां बट्टी उ प्रेम करदींनि अर कई चीजों तैं पाणै की चाह ऊंमा समैके वचन तैं दबै दींदु अर वे तैं कुछ फैदा नि हुंदा।
23
अर जु अच्छी भूमि मा बुतै गैनी उ यु छिनी जु वचन तैं सूंणि के स्वीकार करदींनि अर फल लंदिनि उ भि कुई सौ गुणा, कुई साठ गुणा, अर कुई तीस गुणा।
24
यीशु ल ऊं तैं एक और मिसाल दींनि स्वर्ग कु राज्य वे किसान जन च जैल अपड़ा पुंगड़ा मा अच्छो बीज बूति।
25
पर जब लोग सिणा छा त वेका दुश्मन शैतान ल पुंगड़ा मा ऐ के ग्यूं का बीज का बीच जंगली बीज बूतिके चलि गै।
26
जब अंकुर निकलीनि अर बलड़ा लगिनि त जंगली घास कि बिज्वाड़ भि दिखै गै।
27
जु पुंगड़ा कु स्वामि छो वेका सेवकों ल वेमा ऐ के बोलि, हे स्वामि क्य तिल अपड़ा पुंगड़ा मा अच्छो बीज नि बूति छो? त फिर जंगली बीज कि बिज्वाड़ वेमा कख बट्टी ऐ?
28
वेल ऊंमा बोलि, यु कै दुश्मन शैतान कु काम च सेवकों ल वेमा बोलि, क्य तेरी मनसा च कि हम जै के जंगली बीजों तैं जौड़ा बट्टी उखाड़ि दियां?
29
वेल बोलि, न इन नि कैरा कि जंगली बीज कि बिज्वाड़ जौड़ा बट्टी उखड़दा दफा तुम ऊं दगड़ी ग्यूं को बीज भि उखाड़ि द्या।
30
लवैइ तक द्वी तैं दगड़ी बढण द्या अर लवैइ का बगत मि लवैइ कन वलो बट्टी बुललु कि पैली जंगली बीज कि बिज्वाड़ बटोरी के फुकणु कु ऊंका पूला बंधि ल्या अर ग्यूं का बीज तैं मेरा कुठार मा कठ्ठा कैरा।
31
यीशु ल ऊं तैं एक और मिसाल दींनि परमेश्वर कु राज्य रैई का बीज जन च जै तैं कै मनिख ल ले के अपड़ा पुंगड़ा मा बूति दींनि।
32
उ सब बाजों से छुटो त हूंद पर जब बड़ी जांदु त तब सब साग-पात से बड़ो हवे जांदु अर वेका इन बड़ो डालो हवे जंदींनि कि आसमान का चलखुडा भि वेका फौंकों मा घोल बणै के बसेरा कैरी सकदींनि।
33
यीशु ल एक और मिसाल ऊं तैं सुंणै कि स्वर्ग कु राज्य खमीर का जन च जै तैं एक जनन ल ले के तीन पथा आटा मा मिलै दींनि अर होंद-होंद उ सब खमीर हवे गै।
34
यु सब बात यीशु लुखुं तैं मिसाल का रूप मा ही शिक्षा दींदो छो अर बगैर मिसाल का परमेश्वर का राज्य का बारा मा कुछ नि बुल्द छो।
35
कि जु वचन परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो का द्वारा बुलै गै छो उ पूरो हवे जौं “मि मिसाल दींणु कु अपड़ो गिच्चु खुललो मि ऊं बातों तैं जु दुनिया की रचना बट्टी छिपी रैनी ऊं बातों तैं मि प्रगट करुलो।”
36
तब यीशु भीड़ तैं छोड़ी के घौर मा ऐ अर वेका चेलों ल वेका संमणी ऐ के बोलि, पुंगड़ा मा कु जंगली बीज की मिसाल हम तैं समझै दे।
37
वेल ऊं तैं जवाब दींनि अच्छा बीज तैं बुतंण वलो मि मनिख कु नौंनो छों।
38
पुगड़ा यु दुनिया का लोग छिनी अर अच्छो बीज राज्य का लोग अर जंगली बीज दुष्ट शैतान कि सन्तान च।
39
अर जै दुष्ट ल ऊं तैं बूति उ शैतान च लवैइ यु दुनिया कु अन्त च अर लवैइ कन वला स्वर्गदूत छिन।
40
जन जंगली बीज बटोरे जंदींनि अर फुके जंदींनि उन ही यु दुनिया का अन्त मा होलो।
41
मि मनिख कु नौंनो अपड़ा स्वर्गदूतों तैं भिजलु अर उ वेका राज्य मा बट्टी सब ठोकर खांण वलो तैं अर अधर्म अर पाप कन वलो तैं कठ्ठा करला
42
अर स्वर्गदूत ऊं तैं आग का कुण्ड मा डललो जख रूंण अर दांतों कु पिसंण होलो।
43
वे बगत मा धर्मी अपड़ा बुबा का राज्य मा सूरज जन चमकलो जु कुई ईं बात तैं सूंणि सकदु जु मि बुल्णु छौं उ यु तैं समझ भि ल्यो।
44
“स्वर्ग कु राज्य कै पुंगड़ा मा छिप्यां धन का समान च जै तैं कै मनिख पै अर छिपै दींनि अर खुशी ल जै के अपड़ो सब कुछ बेचि दींनि अर वे पुंगड़ा तैं मोल ले लींनि।”
45
“फिर स्वर्ग कु राज्य एक व्यापारी जन च जु अच्छा मोतियों कि खोज मा छो।”
46
जब वे तैं एक कीमती मोति मिली गै त वेल जै के अपड़ो सब कुछ बेचि के वे तैं मोल ले लींनि।
47
“फिर स्वर्ग कु राज्य वे माछा पकड़ण वला जाल का समान च जु समुद्र मा डले गै अर बनि-बनि किस्मै का माछों तैं घेरि के लै।”
48
अर जब जाल भुरे गै त मछवै वे तैं छाला पर खींचि के लैनि अर बैठी के भलि-भलि त ठेकि हुंद कठ्ठा कैरी अर निकम्मा माछा फेंकि दींनि।
49
दुनिया का अन्त मा भि इन ही होलो स्वर्गदूत ऐ के दुष्टों तैं धर्मियों बट्टी अलग करला
50
अर दुष्टों लुखुं तैं आग का कुण्ड मा डलला जख रूंण अर दांतों कु पिसंण होलो।
51
“यीशु ल ऊंमा बोलि क्य तुम ल यूं बातों तैं समझेलि, चेलों ल वेमा बोलि, हाँ।”
52
यीशु ल ऊंमा बोलि, “इलै हर एक मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वला जु स्वर्ग का राज्य कु चेला बंणि उ वे घौर का स्वामि जन च जु अपड़ा भण्डार बट्टी नई अर पुरांणि चीजों तैं निकालदु च।”
53
जब यीशु ल यु सभि मिसाल दियेलि छै त तब उख बट्टी चलि गै।
54
अर अपड़ा घौर नासरत नगर मा ऐ के उख परमेश्वर बट्टी यहूदियों का मिलणा का भवन मा ऊं तैं परमेश्वर का वचन की शिक्षा दींण लगि गै कि उ भैंचक मा पड़ी के बुल्ण लगि गैनी “यु तैं यु ज्ञान अर चमत्कार का काम कैल दींनि?”
55
क्य यु बड़ई कु नौंनो नि च? क्य ये कि ब्वे कु नौं मरियम अर येका भयों कु नौं याकूब यूसुफ शमौन अर यहूदा नि च?
56
अर क्य वेकी बैंण इख हमारा बीच मा नि रौदींनि? त फिर ये तैं यु सब कख बट्टी मिली?
57
इलै ऊंल वे तैं स्वीकार नि कैरी पर यीशु ल ऊंमा बोलि, कि परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो कु अपड़ा देश अर अपड़ा कुटुम्ब अर अपड़ा घौर तैं छोड़ी के ऊं तैं सब जगह आदर हूंद।
58
अर ऊंका अविश्वास का कारण यीशु ल और कुछ चमत्कार का काम कैर साकी।
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