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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Matthew 25
Matthew 25
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
फिर यीशु ल अपड़ा चेलों मा बोलि जब मि मनिख कु नौंनो वापिस आलो तब स्वर्ग की ऊं दस कुँवारियों का जन होलो जु अपड़ा दिवडा लै के ब्योला दगड़ी मुलाकात कनु कु गैनी।
2
ऊंमा बट्टी पाँच त मूर्ख छै अर पाँच समझदार छै।
3
पाँच मूर्ख अणबिवाकों ल अपड़ी दिवडों तैं ले छैं पर अफ दगड़ी जैतून कु तेल नि लैंनि
4
पर समझदा अणबिवाकों ल अपड़ा दिवडों का दगड़ा अपड़ी कुप्पियुं मा जैतून कु तेल भि भोरि दींनि।
5
जब ब्योला का औंण मा देर हवे त तब उ सभि जमाण लगि गैनी अर सै गैनी।
6
“पर अधा राती मा कैल धै लगै कि देखा ब्योला औणु च वे तैं मिलणु कु चला।”
7
तब उ सभि अणबिवाक बिजनी अर अपड़ा-अपड़ा दिवडों तैं ठिक कन लगि गैनी।
8
अर मूर्ख अणबिवाकों ल समझदार अणबिवाकों कु बोलि अपड़ा जैतून कु तेल मा बट्टी कुछ हम तैं भि द्या किलैकि हमारा दिवडा बुझंण वला छिन।
9
पर समझदार अणबिवाकों ल बोलि “न त यु तेल ल हम कु पूरो हूंण अर न तुम कु। ठिक त यु च कि तुम बजार जै के अफ कु तेल मोल ल्यावा।”
10
जब उ मोल ल्योंणु कु जांणा छा त ब्योला ऐ गै अर जु तैयार छा उ वे दगड़ी ब्यो का घौर मा चलि गैनी अर तब द्वार बंद किये गै।
11
वेका बाद उ दुसरी कुँवारियाँ भि वापिस ऐनी रूंदा अर ब्योला तैं बुल्ण लगि गै “हे स्वामी, हे स्वामी हम कु द्वार खोल।”
12
पर वेल बोलि, “मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि मि तुम तैं नि जंणदु।”
13
इलै बिंज्या रावा किलैकि तुम नि जंणदयां मेरा वापिस औंण का उ दिन अर उ बगत कब आलो।
14
या वे मनिख कि सी दशा च जु मनिख एक लंबी यात्रा मा जांणु छो अपड़ा दासों तैं बुलै के अपड़ी सम्पति ऊं तैं सौंपी दींनि।
15
वेल एक तैं पाँच चांदी का सिक्का अर दुसरा तैं द्वी अर तिसरा तैं एक हरेक तैं वेकी सामर्थ का अनुसार दींनि अर तब परदेश चलि गै।
16
तब जै तैं सौ साल की मजदूरी दीं छै पाँच चांदी का सिक्का मिली छा वेल तुरंत जै के वां ल लेन-देन कैरी अर पाँच चांदी का सिक्का और कमै।
17
इन ही जै तैं द्वी चांदी का सिक्का मिली छा वेल भि द्वी और कमै।
18
पर जै तैं एक मिली छो वेल जै के धरती खोदि अर अपड़ा मालिक का रूपया तैं लुकै दींनि।
19
भौत दिनों का बाद ऊं सेवकों कु स्वामि ऐ के ऊं बट्टी हिसाब लींण लगि गै।
20
जै तैं पाँच दीनार मिली छा, वेल पाँच दीनार तैं लैई के बोलि, “हे स्वामि तिल मि तैं पाँच दीनार सौंपी छा देख मिल पाँच दीनार और कमै।”
21
वेका मालिक ल वेकु बोलि, धन्य च अच्छा अर ईमानदार सेवक तु थोडी धन राशि तैं संभलण मा ही विश्वासयोग्य रै मि त्वे तैं भौत चीजों कु अधिकारी बंणौलु। औ अर अपड़ा स्वामी की खुशी मा शामिल हवे जा।
22
अर जै तैं द्वी चांदी का सिक्का मिली छा वेल भि ऐ के बोलि, हे स्वामी तिल मि तैं द्वी चांदी का सिक्का दे छा देख मिल द्वी चांदी का सिक्का और कमै।
23
वेका स्वामी ल वेकु बोलि, धन्य अच्छा अर ईमानदार सेवक तु जरासी धन राशि का संभलण मा विश्वासयोग्य रै मि त्वे तैं भौत चीजों कु अधिकारी बंणौलु। अपड़ा स्वामी कि खुशी मा शामिल हवे जा।
24
तब जै तैं एक चांदी का सिक्का मिली छो वेल ऐ के बोलि, हे स्वामी मि त्वे तैं जंणदु छो कि तु कठोर मनिख छै: तु एक इन मनिख जन छै जु दुसरा लुखुं का काम बट्टी फायदा कमाणै की उम्मीद करदी छै।
25
इलै की जु मिल तेरु पैसा हर्चेदीनि त तु मि तैं सज़ा दीलि मि डैरी ग्यों चांदी का सिक्का धरती मा लुकै दींनि। देख जु तेरु च उ यु च।
26
वेका स्वामी ल वे तैं जवाब दींनि, हे दुष्ट अर अलकसी सेवक जब तु यु जंणदी छै कि मि भौत कठोर मनिख छै अर एक इन मनिख जन छै जु दुसरा लुखुं का काम बट्टी फायदा कमाणै की उम्मीद करदो छै
27
त त्वे तैं यु कन चयणु छो कि मेरा रुप्या तैं लेंन देन कन वलो तैं दे दींण तब मि ऐ के अपड़ा धन तैं ब्याज समेत ले लींदु।
28
तब स्वामी ल अन्य दासों मा बोलि, इलै उ चांदी का सिक्का तैं वे बट्टी ले ल्या अर जै मा दस चांदी का सिक्का छिनी वे तैं दे द्या।
29
किलैकि जै मा थोड़ी भि मेरी बातों तैं समझणु की समझ छैं च वे तैं और दिये जालि पर जै मा थोड़ा भि नि च वेमा बट्टी उ भि लिये जालि जु वेमा छैं च।
30
अर यु निकम्मा सेवक तैं का अंधेरा मा डाली द्या जख रूंण अर दांतों को पिसंण होलो।
31
जब मि मनिख कु नौंनो अपड़ी महिमा मा आलो अर सब स्वर्गदूत वे दगड़ी आला त उ अपड़ी महिमा का सिंहासन पर विराजमान होलो।
32
अर सब जातियों का लोग मेरा संमणी कठ्ठा करे जालि अर जन बकरोलु ढिबरा तैं बकरुं बट्टी अलग कैरी दींदु उन ही उ, ऊं तैं एक हैंका बट्टी अलग करलो।
33
अर मि धर्मी लुखुं तैं अपड़ी दैंणि तरपां बखरा जन, अर अधर्मी लुखुं तैं बैंं तरपां ढिबरा जन करलो।
34
तब राजा अपड़ी दैंणि तरपां वलो बट्टी बुललो, “हे मेरा बुबा का धन्य लुखुं आवा वे राज्य का अधिकारी हवे जा जु दुनिया का पैली बट्टी तुम कु तैयार करयूं च।”
35
किलैकि जब मि भुखी छो त तुम ल मि तैं खांणु कु दींनि, जब मि तिस्सलो छो, त तुम ल मि तैं पांणि पिलै, जब मि परदेशी छो, त तुम ल मि तैं अपड़ा घौर मा ठैरे
36
जब मि नंगि छो, त तुम ल मि तैं कपड़ा पैरेनि, “जब मि बिमार छो त तुम ल मेरी देख रेख कैरी” जब मि जेल का भितर छो त तुम मि तैं मिलणु कु अयां।
37
तब धर्मी लोग वे तैं जवाब द्याला हे प्रभु हम ल कब त्वे तैं भुखी देखि अर त्वे तैं खिलै? या तिस्सलु देखि अर त्वे तैं पांणी पिलै?
38
हम ल कब त्वे तैं परदेशी देखि अर अपड़ा घौर मा ठैरे? या नंगि देखि अर कपड़ा पैरुणु कु दींनि?
39
हम ल कब त्वे तैं बिमार या बन्दीगृह मा देखि अर त्वे तैं मिलणु कु अयां?
40
तब मि राजा ऊं तैं जवाब दयालो मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि तुम ल जु मेरा यूं छुटा से छुटा मेरा चेला विश्वासी भयों मा बट्टी कै एक का दगड़ा भि कैरी उ सब मि ही दगड़ी कैरी।
41
तब उ अपड़ा बैंं तरपां वलो कु बुललो हे श्रापित लुखुं मेरा संमणी बट्टी वीं अनन्त आग मा चलि जावा जु शैतान अर दुष्टदूतों कु परमेश्वर ल तैयार करीं च।
42
किलैकि जब मि भुखी छो अर तुम ल मि तैं खांणु सुध नि लींनि मि तिस्सलु छो अर तुम ल मि तैं पांणी नि पिलै
43
मि परदेशी छो अर तुम ल मि तैं अपड़ा घौर मा नि ठैरे मि नंगि छो अर तुम ल मि तैं कपड़ा पैरुणु कु नि दींनि मि बिमार अर जेल मा छो अर तुम ल मेरी सुध नि लींनि।
44
तब उ जवाब द्याला हे प्रभु हम ल त्वे तैं कब भूखो या तिस्सलु या परदेशी या नंगी या बिमार या जेल मा देखि अर तेरी सेवा टहल नि कैरी?
45
तब मि ऊं तैं जवाब दयालो मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि तुम ल जु यूं छुटा से छुटुं मा बट्टी कै एक का दगड़ा मा नि कैरी उ सब मि दगड़ी भि नि कैरी।
46
अर उ जु बैंं अर छा अनन्त विनाश की सजा भुगला पर धर्मी लोग अनन्त जीवन मा वास करला।
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