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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Matthew 18
Matthew 18
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
तब तुरंत चेला यीशु का संमणी ऐ के पुछण लगि गैनी “स्वर्ग का राज्य म बड़ो कु च?”
2
ऊंका यु सवाल का जवाब मा वेल एक बच्चा तैं ऊंका नजीक मा खड़ो कैरी।
3
अर बोलि, “मि तुम मा सच बुल्ण छौं कि तुम मनों तैं फिरैल्या अर बच्चों का जन बंणिल्या तब तुम ल स्वर्ग का राज्य मा जै सकण।”
4
जु कुई अफ तैं ये बच्चा की तरौं नम्र बणालु उ परमेश्वर का राज्य मा सबसे बड़ो होलो।
5
अर जु कुई मेरा नौं से एक इन बच्चा तैं स्वीकार करदो उ मि तैं स्वीकार करदो।
6
पर जु कुई यूं छुटों मा बट्टी जु मि पर विश्वास करदींनि ऊं तैं उतेडो लगौ त वेकु त यु भलो च कि उ अपड़ा गौळा मा जंदरा को पाट लटकाये जौं अर उ समुद्र मा डाले जौं।
7
ठोकर का कारण से दुनिया पर हाय ठोकर को लगंण जरूरी च पर हाय च वे मनिख पर जैकी तरपां बट्टी ठोकर का कारण पाप हुंद।
8
पाप का वे कारण तैं अफ बट्टी दूर कैरी के निकाली दे अर वे तैं स्वीकार कर जन जु तेरु हथ त्वे तैं ठोकर लगौ त वे तैं काटि दे बगैर हथ त्वे तैं स्वर्ग मा जांण यां बट्टी भलो च कि द्वी हथ हवे कै भि नरक की अनन्त आग मा डाले जै।
9
पाप का वे कारण तैं अफ बट्टी दूर कैरी के निकाली दे अर वे तैं स्वीकार कर जन जु तेरा आँखों त्वे तैं उतेडो लगौ त वे तैं निकाली दे कांणो हवे कै परमेश्वर का राज्य मा जांण त्वे कु भलो होलो कि द्वी आँखा हवे कै भि तु नरक मा डाले जै।
10
“देखा तुम मा यूं छुटों मा बट्टी कै तैं भि तुच्छ नि जणयां किलैकि मि तुम मा बुल्णु छौं, कि स्वर्ग मा ऊँका स्वर्गदूत मेरा बुबा की उपस्थिति मा रौंदा छिन।”
11
किलैकि मि मनिख कु नौंनो हरच्यां लुखुं तैं बचांणु कु ऐ।
12
“तुम क्य समझदियां? जु कै मनिख कि सौ ढिबरा हो अर ऊंमा बट्टी एक हरचि जौं त उ निन्यानबे तैं एक सुरक्षित जगह मा छोड़ी के उ न पौड़ो पर जै के वीं हरचिं ढिबरा तैं नि खुज्यालो?
13
अर जु इन हो कि व मिली जौं त मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि उ ऊं निन्यानबे ढिबरों कु जु हरचि नि छै इथग खुशी नि मंणालु जथग कि ईं हरचिं ढिबरा कु खुशी मंणालु।
14
इन ही तुमारा बुबा जु स्वर्ग मा च या मनसा च कि यूं छुटों मा बट्टी कै एक को भि नाश न हो।
15
जु तेरु विश्वासी भैय तेरा विरुद्ध अपराध कैर त जा अर यखुली मा बात कैरी कै वे तैं समझौ अर पश्चाताप कैर, त तु अपड़ा विश्वासी भैय तैं वापिस पयेलि।
16
जु उन ही सूंणु त एक या द्वी आदमियों तैं अफ दगड़ी ली जा, किलैकि मूसा की व्यवस्था का अनुसार हरेक पाप कु द्वी या ऊं से जादा गवाहों का द्वारा पक्की हवे जौं।”
17
जु उ ऊंकी भि नि मांणु त मण्डलि मा जै कै बोलि दे पर जु उ मण्डलि कि भि नि मांणु त वेका दगड़ी वे जन ही बरतौ किये जौं तुम कै अन्यजाति या चुंगी लींण वलो का दगड़ी किये जौ।
18
“मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि जु कुछ तुम धरती मा बन्धिल्या उ स्वर्ग मा बंधे जालो अर जु कुछ तुम धरती मा खोलिल्या उ स्वर्ग मा खुलै जालो।
19
फिर मि तुम मा बुल्णु छौं जु तुम मा बट्टी द्वी आदिम कैं बात कु एक मन हवे के वीं बात तैं मगिल्या त व मेरा बुबा कि तरपां बट्टी जु स्वर्ग मा च उन ही तुम कु हवे जालो।
20
किलैकि जख द्वी या तीन आदिम मेरा शिष्य हूंणु कु कठ्ठा हूंदींनि उख मि ऊंका बीच मा हूंद किलैकि तुम मेरा शिष्य छा।”
21
तब पतरस ल संमणी ऐ के वेमा बोलि, “हे प्रभु जु मेरू विश्वासी भैय अपराध कनु रौ त मि वे तैं कथग बार माफ कैर?” क्य सात बार तक
22
यीशु ल वेमा बोलि, “मि त्वे मा यु नि बुल्णु कि सात बार तक बल्कि सात का सत्तर बार का तुम वे तैं माफ कर दींण चयणु च।”
23
इलै स्वर्ग राज्य वे मिसाल का जन च जै ल अपड़ा सेवकों बट्टी हिसाब किताब लींण चै।
24
जब उ हिसाब लींणु छो त एक मनिख वेका संमणी लये गै जु दस हजार तोडों कु कर्जदार छो।
25
जबकि वे मा चुकौंणु कु कुछ नि छो त वेका स्वामि ल बोलि यु अर ये कि घरवलि अर बाल-बच्चा अर यु मा जु कुछ भि च सब बिके जौं अर फिर कर्ज चुकाये जौं।
26
ईं बात पर वे सेवक ल झुकि के वे तैं प्रणाम कैरी अर बोलि, हे स्वामि जरा कुछ दिन और ठैर मि तेरु सब कुछ चुकै दयुलु।
27
तब वेका स्वामि तैं वे पर दया ऐ अर वे तैं छोड़ी दींनि अर वेको कर्ज भि माफ कैरी दींनि।
28
“पर जब उ सेवक भैर निकली त वे दगड़िया सेवकों मा बट्टी एक वे तैं मिली जु वेको सौ दिन की मजदूरी को कर्जदार छो वेल वे तैं पकड़ी के वेको गौला घोंटी अर बोलि जु कुछ त्वे पर कर्ज च भोरि दे।”
29
ईं बात पर उ सेवक झुकि के वे बट्टी बिनती कन लगि गै कि जरा कुछ दिन और ठैर मि सब भोरि दयुलु।
30
वेल नि मांणि पर जै के वे तैं जेलखना मा डाली दींनि कि जब तक कर्ज नि भोरि द्यो तब तक उखि रौ।
31
वेका दगड़िया यु जु कुछ हवे छो देखि के भौत दुखी हवेनि अर जै के अपड़ा स्वामि तैं ईं बात कु समाचार दे दींनि।
32
तब दास स्वामि ल वे तैं बुलै के वेमा बोलि हे दुष्ट सेवक तिल जु मि बट्टी गिड़गिड़ाहट कैरी छो त मिल तेरु सैरो कर्ज माफ कैरी दींनि।
33
इलै की जन मिल त्वे पर दया कैरी, जन मिल त्वे पर दया दिखै अर तेरु कर्ज़ तैं माफ कैर दिया?
34
अर वेका स्वामि ल गुस्सा मा ऐ के वे तैं दण्ड दींण वलो का हथ मा सौंपी दींनि कि जब तक उ सब कर्ज नि भोरि द्यो तब तक ऊंका हथ मा रौ।
35
“इलै इन ही कुई तुम मा बट्टी हर एक अपड़ा विश्वासी भैय का पापों तैं मन से माफ नि करलो त मेरा बुबा जु स्वर्ग मा च, तुम दगड़ी भि उन ही करलो।”
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