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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Matthew 24
Matthew 24
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
जब यीशु यरूशलेम शहर का मन्दिर बट्टी भैर जांणु छो त वेका चेला वे तैं मन्दिर की रचना दिखांणु कु वेका संमणी ऐनी।
2
यीशु ल वेकु बोलि, “तुम मा सच बुल्णु छौं दिखणा छा इख ढुंगा मा ढुंगा भि नि रांण जु ढोळे नि जालो।”
3
जब उ जैतून डाला का डांडा पर बैठयां छा त चेलों ल एकुंत मा वेका संमणी ऐ के बोलि, “हम तैं बतौ कि यूं बातों ल कब हूंण? तेरु औणो को अर दुनिया कु अंत को क्य चिन्ह होलो?”
4
यीशु ल ऊं तैं जवाब दींनि, “सचेत रावा कुई तुम तैं भरमै नि सैकु।”
5
भौत लोग मेरा नौं का अधिकार कैरी के आला अर ऐ के बुलला मि मसीह छो अर भौत लुखुं तैं ऊं का विश्वास बट्टी भरमै दयाला।
6
जब तुम लड़ै अर लड़ैयूं कि चर्चा सुणल्या त घबरैयां न किलैकि यूं बातों कु हूंण जरूरी च पर वे बगत अंत नि होलो।
7
किलैकि एक जाति दुसरी जाति पर अर एक राज्य हैंका राज्य पर राज्य कनु कु चड़ै करलो अर जगह-जगह अकाल पड़ुलो अर भ्यूंचोळ होला।
8
यु सब शुरुवाती पिड़ा की होलि जन बच्चा पैदा हूंण से पैली हूंदी।
9
तब उ लोग जु तुमारा विरोध करदा छिन क्लेश दिलांण कु तुम तैं पकड़वाला अर किलैकि तुम मि पर विश्वास करदा छा सभि जातियों का लोग तुम से बैर रखला।
10
तब भौत सैरा मि पर विश्वास कन बंद कैर दयाला अर एक दुसरा तैं पकड़वाला अर एक दुसरा से बैर रखला।
11
भौत सा परमेश्वर कु संदेश दींणवला आला अर भौत सा लुखुं तैं धोखा दयाला।
12
अर अधर्म का बढंण से बहुत लोग दुसरा से प्रेम नि करला।
13
पर जु अपड़ा जीवन का अंत तक मि पर विश्वास रखला, वेको उद्धार हवे जालो।
14
अर पिता परमेश्वर का राज्य का बारा मा शुभ सन्देश सैरा दुनिया मा प्रचार किये जालो की सभि जातियों पर गव्है हो तब दुनिया कु अंत हवे जालो।
15
“इलै जब तुम वीं उजड़ण वलि तुच्छ मूर्ति तैं ज्यां कि चर्चा दनिय्येल परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वला ल कैरी छै वीं तैं पवित्र जगह मा खड़ी देखि ल्या जु पढ़ो उ समझी ल्यो।”
16
तब जु यहूदिया प्रान्त मा हूंनु उ डांडों मा भाजि जालो।
17
जु छत पर हूंनु उ अपड़ा घौर बट्टी कुछ समान लींणु कु मूड़ी घौर का भितर नि उतरुनु अर उख बट्टी भागि जा।
18
अर जु पुंगड़ा मा हो उ अपड़ा कपड़ा लींणु कु घौर कु पिछनै नि लौटु।
19
यु ऊं महिलाओं कु भौत भयानक बगत होलो जु दुबस्ता हवेलि अर जु दूध पिलांदि हवेलि ऊंकु भगण भौत मुश्किल होलो।
20
इलै पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना करयां कि यु जाड़ों मा यहूदियों का विश्राम का दिन नि हो जब कखि भि जांण कठिन हो।
21
किलैकि उ दिन इन कलेश का होला कि यु दुनिया का बनांण बट्टी जु कुछ परमेश्वर ल रचि न त अभि तक न हवे नि अगनैं हूंण।
22
जु यु आंण वला दिन घटैये नि जांदा त कै भि प्राणि कु उद्धार नि हूंण छो पर ऊं चुणयां मनिख्युं का खातिर जौं तैं वेल चुणि ऊं दिनों तैं घटैये गै।
23
वे बगत मा जु कुई तुम कु बुललो “देखा मसीह इख च” या देखा उख च त यकीन नि करयां।
24
किलैकि झूठा मसीह अर परमेश्वर कु संदेश दींणवला झूठा लोग आला अर चिन्ह अर शैतान का झूठा चमत्कार दिखाला कि हवे साको त परमेश्वर का चुणयां लुखुं तैं भि भरमै द्याला।
25
पर तुम चकडैति से रयां मिल सभि घटनाओं तैं तुम तैं पैली बट्टी बतयले।
26
इलै जु उ तुम मा बुलुनु देखा उ एकांत जंगल मा च त भैर नि निकलयां या इन बुलुनु देखा उ कोठरियों मा च त विश्वास नि करयां।
27
किलैकि जन बिजली पूरब बट्टी पश्चिम तक चमकदी उन ही मि मनिख कु नौंनो को औंण भि होलो।
28
जख लांश हो, उखि गरुड़ कठ्ठा हवाला।
29
ऊं दिनों मा वे कलेश खत्म हूंणा का बाद सूरज अर जून अपड़ो उज्यला दींण बंद कैरी द्याला अर आसमान बट्टी गैणा मूड़ि पोड़न लगि जाला अर आकाश कि सैरी शक्ति अर चिन्ह हिलैये जाला।
30
मि मनिख कु नौंनो कु चिन्ह आसमान मा दिखै जालो अर तब धरती का सब जाति का लोग अपड़ी छाति पिटला अर मि मनिख कु नौंनो तैं सैरी सामर्थ, सैरी शक्ति अर महिमा का दगड़ा मा आसमान का बादलों पर औंण दिखला।
31
उ तुरै कि बड़ी आवाज का दगड़ा अपड़ा स्वर्गदूतों तैं भिजलु अर उ धरती का यु छोर बट्टी आसमान का वे छोर तक चौदिशों बट्टी अपड़ा चुणयां लुखुं तैं कठ्ठा करलो।
32
बेडु का डाला बट्टी इन सीखा जब वेकी फौंकि कुंगळी हवे जंदींनि अर वे पर मौलयार आंण लगि जांदु त तुम जांणि जणदां कि गर्मी कु मौसम आंण वलो च।
33
अर इन ही कै जब तुम यूं बातों हूंण दिखल्या त जांणि लियां कि मि मनिख कु नौंनो को आंण नजीक च बल्कि ऐ ही गै।
34
मि तुम मा सच बुल्णु छौं जब तक यु सभि बात नि हवेलि तब तक यूं लुखुं मा बट्टी भौत स इन छिनी जु ईं घटना का हूंण तक नि मुरला।
35
आसमान अर धरती टळि जालि पर मेरी बोलि बात कभि भि नि टळदि।
36
अर कै तैं भि वीं दिन अर सै बगत कु पता नि जब मि दुबारा औलु न स्वर्गदूत अर न मि जु नौंनो छो भस परमेश्वर पिता वे बगत तैं जंणदु।
37
जन नूह का दिन छा उन ही मि मनिख कु नौंनो को औंण भि होलो।
38
किलैकि जन जलप्रलय से पैली का दिनों मा जै दिन तक कि नूह जहाज पर नि चैड़ि छो वे दिन तक लोग खांदा पींदा छा अर ऊंमा ब्यो हूंदों छा।
39
अर जब तक जलप्रलय ऊं सभियूं तैं बुगै के नि लीगे तब तक ऊं तैं कुछ भि पता नि चैलि उन ही मि मनिख कु नौंनो को औंण भि होलो।
40
वे बगत मा द्वी माबुत पुंगड़ा मा होला ऊंमा बट्टी एक लिये जालो अर हैंको छुड़े जालो।
41
द्वी जनन जंदरु पिसंणि राली ऊंमा बट्टी एक लिये जालि अर हैंकी छुड़े जालि।
42
इलै चैतल रावा तुम नि जंणदयां कि तुमारा प्रभु कै दिन आलो।
43
पर यु जणिल्यो कि जु घौर कु स्वामि जांणि जांदु कि चोर कैं बगत आलो त बिज्यूं रौंदो अर अपड़ा घौर मा चोरी नि हूंण दींदो।
44
इलै तुम भि तैयार रावा किलैकि जैं बगत का बारा मा तुम सुचदा भि नि छा वीं बगत मा मि मनिख कु नौंनो ऐ जालो।
45
“अर उ भरोसो का लैख अर बुद्धिमान सेवक कु च जै तैं स्वामि ल अपड़ा नौकर-चाकरों पर मुखिया ठैरे, कि बगत पर ऊं तैं खांणु द्यो?”
46
धन्य च उ सेवक जै तैं वेको स्वामी ऐ के इन ही करदु दिखलु।
47
मि तुम मा सच बुल्णु छौं उ वे तैं अपड़ी सैरी सम्पति पर अधिकारी बंणालु।
48
पर जु दुष्ट सेवक सुचण लगि कि मेरा स्वामि का औंण मा देर च
49
अर अफ दगड़िया सेवकों तैं पिटण लगि जौं अर पियक्कड़ु का दगड़ा मा खान्दो-पीन्दु।
50
त वे सेवक को स्वामी इन दिन मा वापिस आलो जब उ वे तैं नि जुगल्णु रालो अर इन बगत मा जै तैं उन ही जंणदु हो
51
तब उ वे तैं भौत कड़ी सजा दयालो अर वेको भाग बांटो कपटि लुखुं का दगड़ा मा ठैरालो उख रूंण अर दांतों कु पिसंण होलो।
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