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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 16
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
फिर उ दिरबे अर लुस्त्रा द्वी शहरों मा भि गै अर देखा उख तीमुथियुस नौं को एक चेला छो जु कैं विश्वासी यहूदिनी कु नौंनो छो पर वेको बुबा यूनानी अन्यजाति देश को छो।
2
उ लुस्त्रा शहर अर इकुनियुम का विश्वासी भयों मा सुनाम छो।
3
पौलुस ल चै कि तीमुथियुस मि दगड़ी चलो। वेको बुबा एक यूनानी अन्यजाति को छो अर पौलुस ल तीमुथियुस को खतना कैरी किलैकि वीं जगह का यहूदी वे तैं स्वीकार कैरी साका।
4
पौलुस अर वेका दगड़िया शहर-शहर जांदी बगत ऊं विधियों तैं जु यरूशलेम शहर का प्रेरितों अर पुरणा अगुवों ल ठैरयीं छै, मनणु कु अन्यजाति विश्वासियों तैं पौंछांदी जांदा छा।
5
इन कै मण्डलि का लोग विश्वास मा मजबूत हूंदी गैनी अर गिणती मा दिनौ दिन बढ़दी गैनी।
6
अर उ फ्रूगिया प्रदेश अर गलातिया का प्रदेश बट्टी हवे के गैनी, अर पवित्र आत्मा ल ऊं तैं एशिया प्रान्त मा वचन सुनांण से मना कैरी।
7
अर ऊंल मूसिया प्रान्त का नजीक पौंछि, के बितूनिया प्रान्त मा जांणै की कोशिश कैरी पर यीशु की आत्मा ल ऊं तैं जांण नि दींनि।
8
तब उ मूसिया प्रान्त बट्टी हवे के बंदरगाह वला शहर त्रोआस मा ऐ।
9
अर पौलुस ल राती एक दर्शन देखि की एक मकिदुनिया प्रान्त का रौंण वला एक आदिम खड़ो हुयुं, वेमा बिनती कैरी के बोलि छों “समुद्र का पार उतरी कै मकिदुनिया प्रान्त मा ऐ, अर हमारी मदद कैर।”
10
पौलुस का यूं दर्शन देखदी ही हम ल झट मकिदुनिया प्रान्त जांणै की योजना बंणै, इन समझी कै कि परमेश्वर ल हम तैं ऊं तैं शुभ सन्देश प्रचार सुणौंणु कु बुल्युं च।
11
इलै की त्रोआस शहर बट्टी जहाज खोलि के जलमार्ग द्वारा हम सीधा सुमात्राके द्वीप अर दुसरा दिन नियापुलिस बंदरगाह मा अयां।
12
उख बट्टी हम मकिदुनिया प्रान्त का फिलिप्पी शहर पौंछयां जु रोमियों की बस्ति कु खास नगर च। अर हम वे नगर मा कुछ दिन रयां।
13
यहूदियों को विश्राम को दिन हम नगर का द्वार का भैर गाड का छाला यु समझी के ग्यां कि इख यहूदियों कु प्रार्थना की जगह हवेलि। अर बैठी कै ऊं जननियों बट्टी जु कट्ठा हवे छा बात कन लगि गैनी।
14
अर लुदिया नौं एक थुआतीरा शहर की बैंगनी कपड़ा बिचण वली जु प्रभु परमेश्वर की एक भक्त छै जु ध्यान से सुनण छै, अर प्रभु ल वीं का मन तैं खोलि इलै की पौलुस की बातों पर ध्यान लगौ।
15
अर जब वीं ल अपड़ी कुटुम्दारी समेत बपतिस्मा लींनि त वीं ल बिनती कैरी कि जु तुम मि तैं प्रभु की विश्वासी समझदा छा त चला अर मेरा घौर मा रावा अर व हम तैं मणै के ली गै।
16
एक दिन जब हम पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कने जगह मा जांणा छा त हम तैं एक दासी मिली, जैं पर एक इन दुष्टात्मा छै, जै की मदद ल उ भविष्य प्रकट कैर दींदी छै, अर इन कै व अपड़ा स्वामियों कु भौत कुछ कमै कै लांदी छै।
17
व पौलुस अर हमारा पिछनै ऐ के चिलांण लगि गै, “कि यु मनिख परमप्रधान परमेश्वर पिता का दास छिनी, उ हम तैं बतांणा छिनी की कनके उद्धार हवे सकद।”
18
व भौत दिन तक इन ही करदी रै, पर पौलुस दुखी हवे, अर मुड़ी के वीं दुष्टात्मा बट्टी बोलि, “मि त्वे तैं यीशु मसीह का नौं से आज्ञा दींदु, कि वीं बट्टी निकली जा अर व आत्मा तुरंत निकली गै।”
19
जब वीं का स्वामियों ल देखि कि हमारी कमै कि आस जांणि च त पौलुस अर सिलास तैं पकड़ी के चौक मा प्रधानों मा खैंचि के लैनी।
20
अर ऊं तैं रोमी न्यायाधीश मा लिजै के बोलि, “यु लोग जु यहूदी छिनी हमारा शहर मा भरि उधम मचाणां छिनी।
21
अर इन बात बतांणा छिनी जै तैं अपनौंण या मनणु हम रोम शहर मा रौंण वलो कु ठिक नि च।”
22
तब भीड़ बट्टी लोग पौलुस अर सिलास खिलाफ मा कट्ठा हवे के ऐनी, अर राज्यपालों ल ऊंका कपड़ा फाड़ी के उतारी दींनि, अर ऊं पर बेत मरणै की आज्ञा दींनि।
23
अर भौत बेत मारि के ऊं तैं जेल मा डाली अर दरोगा तैं आज्ञा दींनि कि ऊं तैं सम्भालि के रखयां।
24
वेल इन आज्ञा पै के ऊं तैं भितरा खण्ड मा रखि अर ऊंका खुटा तैं लखड़ो का बेड़ियों मा जकड़ी दींनि।
25
अधा राती का लगभग पौलुस अर सिलास पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना करदी अर परमेश्वर का भजन गाणा छा, अर कैदी ऊंकी सुनणा छा।
26
त इथग मा अचानक बड़ो भ्वींचलु हवे, इख तक कि जेल कि बुनियाद हिली गै, अर चम सभि द्वार खुली गैनी; अर सभियूं का बन्दखण भि खुली गैनी।
27
अर दरोगा बिजि गै, अर जेल का द्वार खुल्यां देखि के समझी कि कैदी भाजि गैनी, त वेल तलवार खैंचि के अफ तैं मरणु कु तैयार हवे गै।
28
पर पौलुस ल जोर से चिल्लै कै बोलि, कि “अफ तैं कुई नुकसान नि पौंछो, किलैकि हम सभि इखि छा।”
29
तब उ दिवडा मंगवै के दौड़ि के भितर ऐ अर डरदि, कौंपदी पौलुस अर सिलास का खुट्टों मा पोड़ी गै।
30
अर ऊं तैं भैर लै के बोलि, “हे सज्जनों उद्धार पांणु कु अर बचणु कु मि क्य कैरू”
31
ऊंल बोलि “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कैर त तु अर तेरी कुटुम्दारी उद्धार पालि अर बची जाली।”
32
अर ऊंल वे तैं अर वेका घौर का सभि लुखुं तैं प्रभु को वचन सुणै।
33
अर राती को तुरंत वेल ऊं तैं लिजै के ऊंका घाव ध्वैनि अर वेल अपड़ा सभि लुखुं समेत झट बपतिस्मा लींनि।
34
वेल ऊं तैं झट अपड़ा घौर लिजै के ऊंका अगनैं खांणु रखि अर सैरी कुटुम्दारी समेत परमेश्वर पर विश्वास कैरी के उ सभि भौत आनन्दित छा।
35
दुसरी सुबेर तब रोमी न्यायधीश ल दरोगा कु सिपैयूं द्वारा संदेश भेजि, कि ऊं मनिख्युं तैं छोड़ी द्या।
36
दरोगा ल यु बात पौलुस तैं सुणैनी कि न्यायधीश ल तुम तैं छोडणै कि आज्ञा भेजेले त अब निकली के शान्ति से चलि जावा।
37
पर पौलुस ल ऊंकु बोलि, “रोम शहर का रौंण वला छा भंगारी नि हूंण पर भि लुखुं का संमणी मारि अर जेल मा डाली दींनि, अर क्य अब उ हम तैं सुरुक कै निकलण चांणा छिनी? इन कै न पर उ खुद ऐ के हम तैं भैर लिजौनु।”
38
जब सिपैयूं ल यूं बातों तैं रोमी न्यायधीश तैं बतै दींनि, अर उ यु सूंणि के कि उ रोमी छिनी उ डैरी गैनी।
39
अर ऐ के वे बट्टी माफी मांगी, अर जेल बट्टी भैर लिजै के बिनती कैरी, कि नगर बट्टी चलि जा।
40
उ जेल बट्टी निकली के लुदिया का इख गैनी, विश्वासी भयों से भेंट कैरी के ऊं तैं शान्ति दींनि, अर चलि गैनी।
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