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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 22
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
“हे विश्वासी भयों, अर पुरणा लुखुं अपड़ा बचाव मा मि जु कुछ भि तुम बुल्णु छौं वे तैं तुम ध्यान से सूंणा।”
2
वे तैं इब्रानी भाषा मा बुल्द सूंणि के, उ एकदम चुप हवे गैनी तब वेल बोलि;
3
“मि यहूदी छौं, मेरू जन्म किलिकिया प्रदेश का तरसुस शहर मा हवे अर यु शहर मा बड़ो हुयुं छौं। मिल अपड़ा पुरखों की व्यवस्था का अनुसार गमलीएल का खुट्टों मा बैठी के बड़ी लगन से शिक्षा पै छै, अर परमेश्वर कु इन धुन लगि, जन कि तुम सभियूं ल आज लगईं च।”
4
मिल प्रभु का रस्ता मा लुखुं तैं इथग सतै कि जनन अर आदिमों तैं बंधि-बंधि के जेलखना म का भितर बंद कैरी दींनि, अर ऊं तैं मरवै भि दींनि।
5
स्वयं महायाजक अर दाना-सयाणों कि सभा भि ईं बात की गव्है दे सकदी च। ऊंमा बट्टी मिल दमिश्क शहर का विश्वासी भयों कु चिठ्ठी ले, जु ऊख छिनी सजा दिलांणु कु बंधि बणै कै यरूशलेम शहर मा ली जै साको।
6
अर जब मि यात्रा कैरी के दमिश्क शहर का नजदीक पौंछू, त इन हवे की दुफरा का लगभग अचानक एक बड़ी उज्यलो स्वर्ग बट्टी मेरा चौतरफी चमकी।
7
अर मि धरती मा पोड़ी ग्यों; अर मिल एक आवाज सूंणि ज्वा मि कु बुल्णी छै कि, “शाऊल, हे शाऊल, तु मि तैं दुःख किलै दींणि छै?”
8
तब मिल जवाब दींनि, “हे प्रभु, तु कु छै?” वेल बोलि, मि नासरत नगर को रौंण वलो यीशु छौं, जै तैं तू दुःख दींणि छै
9
अर मेरा दगड़ियों ल उज्यलो त देखि, पर जु मि बट्टी बुल्णु छो ऊं तैं एक आवाज सुणै, पर ऊं तैं नि समझ मा ऐ कि आवाज ल मि बट्टी क्य बोलि।
10
तब मिल बोलि, “हे प्रभु, मिल क्य कन?” प्रभु ल मि कु बोलि, उठ अर दमिश्क शहर मा जा अर जु काम त्वे तैं कनु कु ठैरयूं च उ सब त्वे तैं उखि बतैये जालो।
11
जब वेका महिमा का तेज का कारण मि तैं कुछ नि दिखै, त मि अपड़ा दगड़ियों को हथ पकड़ी के दमिश्क शहर मा चलि ग्यों।
12
उख हनन्याह नौं को एक आदिम छो उ व्यवस्था का अनुसार धर्मी छो, अर उख रांण वला यहूदी लुखुं मा आदरमान छो।
13
वेल मि मा ऐ के बोलि, “हे भैय शाऊल तु दुबरा दिखण लगि जा” अर तुरंत वेका आंखा खुली गैनी अर मिल उ देखि।
14
“तब वेल बोलि, हमारा पूर्वजों का परमेश्वर ल त्वे तैं इलै ठैरयूं च की तु वेकी इच्छा तैं जांणि लये, अर तू वे धर्मी आदिम मसीह तैं देख अर वेकी आवाज तैं सूंण।
15
किलैकि तु वेकी तरपां बट्टी सभि लुखुं का संमणी यूं बातों को गवाह हवेलि, जु तिल देखिनी अर सुंणिनि।
16
अब तु देर किलै कनी छै? उठ, बपतिस्मा ले, अर वे बट्टी प्रार्थना का द्वारा अपड़ा पापों बट्टी शुद्ध हूंणु कु माफी मांग”
17
जब मि फिर यरूशलेम शहर का मन्दिर मा ऐ के पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कनु छो, तब मि बेसुद हवे ग्यूं।
18
अर मिल प्रभु यीशु की आवाज सूंणि, जल्दी कैरी कै “यरूशलेम शहर बट्टी झट निकली जा किलैकि उ लोग जु यख छिनी मेरा बारा मा तेरी गव्है नि मणला”
19
“मिल प्रभु मा बोलि, हे प्रभु यु लोग जंणदा छिनी, कि मि एक यहूदियों का मिलणा का भवन मा बट्टी दुसरा यहूदियों का मिलणा का भवन मा ग्यूं ऊं लुखुं तैं बंधि बनांणु कु अर मरणु कु जु त्वे पर विश्वास करदींनि इलै, मि तैं यु समझ मा नि आंद कि यरूशलेम शहर मा यहूदी लोग मि पर विश्वास किलै नि करदींनि।
20
अर जब तेरु गव्हा स्तिफनुस को ल्वे बुगैये जांणु छो, त मि भि उख ही मा खड़ो हुयुं छो, अर मि ईं बात मा राजि छो अर वे तैं मरण वलो का कपड़ोंं कि देखभाल कनु छो”
21
“अर प्रभु ल मि कु बोलि, चलि जा; किलैकि मि त्वे तैं अन्य-जातियों का लुखुं मा दूर-दूर तक भिजलु”
22
इख तक त लोग पौलुस की बातों तैं ध्यान से सुनणा रैनी पर तब ऊंचा शब्द बट्टी चिल्लैनी, “इन्दरा आदिम तैं मारि द्या; यु ज्यूंदा रांण का लैख नि च!”
23
तब उ चिल्लांणा अर अपड़ो चोला तैं फड़दींनि अर अपड़ो गुस्सा दिखांणु कु आसमान मा धूल उडाणा छा।
24
तब रोमी पलटण का सेनापति ल बोलि, “यु तैं किला का भितर लिजावा; अर कोड़ा मारि के परखा, ज्यां बट्टी मि तैं पता चलि जौं कि लोग किलै येका खिलाफ चिल्लांणा छिनी।”
25
पर जन ऊंल वे तैं जूड़ों ल बंधि त तब पौलुस ल उख मा खड़ा हुयां सेनापति कु बोलि, “क्य यु ठिक च कि तुम एक रोमी मनिख तैं बगैर के भंगार का कोड़ा मारा?”
26
सुबदार ल इन सूंणि के पलटण का सेनापति मा जै के बोलि, “तु क्य कनि छै? यु आदिम त रोमी मनिख च।”
27
तब रोमी पलटण का सेनापति ल पौलुस मा ऐ के बोलि, “मि तैं बतौ कि क्य तु रोमी छै?” वेल बोलि, “हां।”
28
तब रोमी पलटण का सेनापति ल बोलि, “मिल त रोमी नागरिकता भौत रुप्या दे के पै।” तब पौलुस ल बोलि, “मि त जन्म से ही रोमी छौं।”
29
तब जु लोग वे तैं परखणवला छा, उ वेमा बट्टी दूर हवे गैनी अर रोमी पलटण को सेनापति भि इन जांणि के कि यु रोमी च, अर वेको वे तैं बंधयूं छो ईं बात से उ डैरी गै।
30
हैंका दिन इन जनणु कु कि यहूदी लोग यु पर भंगार किलै लगांणा छिनी सुबदार ल पौलुस का बंधन खोलि दींनि; अर प्रधान याजक अर सैरी महासभा तैं एक ही जगह मा कट्ठा हूंणु कु आज्ञा दींनि, अर पौलुस तैं मुड़ी लिजै के ऊंका संमणी खड़ो कैरी दींनि।
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