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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 23
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
पौलुस ल महासभा जनै एकटक लगै के देखि, अर बोलि, “हे विश्वासी भयों मिल, आज तक परमेश्वर कु सच्चा मन बट्टी अपड़ो जीवन बसर कैरी।”
2
पौलुस ल जु बोलि, उ सूंणि के हनन्याह महायाजक ल, वे तैं जु वेका संमणी खड़ा छा, वेका मुक पर थप्पड़ मरणे की आज्ञा दींनि।
3
पौलुस ल वेको बोलि, “हे पाखंडी परमेश्वर त्वे तैं मरलो। तू व्यवस्था का अनुसार मेरू न्याय कनु कु बैठी छै, अर फिर क्य व्यवस्था का खिलाफ मि तैं मरणै कि आज्ञा भि दींणि छै?”
4
उ आदिम जु नजदीक मा खड़ा हुयां छा, ऊंल पूछि, “क्य तु परमेश्वर का महायाजक की बेजती कनी छै?”
5
पौलुस ल बोलि, “हे विश्वासी भयों मि यु नि जंणदु कि यु महायाजक च। किलैकि परमेश्वर का वचन मा लिख्युं च, कि तु अपड़ा लुखुं का प्रधान तैं गलत नि बोलि”
6
जब पौलुस ल देखि, कि कुछ सदूकी अर कुछ फरीसी आदिम उख छा, महासभा मा पुकारी के बोलि, “हे विश्वासी भयों, मि फरीसी अर फरीसियों कु वंश को छों, मेरी जांच इलै हूंणी च, किलैकि मेरी आस च की पिता परमेश्वर मुरयां लुखुं तैं फिर ज्यून्दो करलो।”
7
जब वेल या बात बोलि फरीसियों अर सदूकियों मा झगड़ा हूंण लगि गै; अर सभा मा फुट पोड़ी गै।
8
किलैकि सदूकी लोग यु विश्वास करदा छा कि लोग मुरणा का बाद ज्यून्दा नि होला, अर न स्वर्गदूत अर न दुष्टात्मा छिनी; पर फरीसी लोग यूं सभि बातों पर विश्वास करदा छा।
9
तब भौत बड़ो घपरौल हवे गै अर मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वलो का कुछ शिक्षकों ल, जु फरीसी छा, उठि के यु बोलि के बहस कन लगि गैनी, “हम यु आदिम मा कुई भि बुरै नि पांणा छा; अर दुष्टात्मा या स्वर्गदूत ल वे बट्टी बात कैरी त फिर क्य?”
10
जब उख भौत घपरौल हवे अर रोमी पलटण का सेनापति तैं डौर लगि गै कि उ पौलुस का टुकड़ा-टुकड़ा नि कैरी द्यां, सिपै का झुंडों तैं आज्ञा दींनि कि उतरी के सभा का लुखुं का बीच बट्टी पौलुस तैं जबरदस्ती निकली, अर किलै मा ली आवा।
11
वीं रात प्रभु यीशु ल पौलुस का संमणी खड़ो हवे के बोलि, “हे पौलुस, हिम्मत रख; किलैकि जन तिल यरूशलेम शहर मा मेरी गव्है दींनि, उन ही त्वे तैं रोम शहर मा भि गव्है दींण होली।”
12
जब दिन हवे, त कुछ यहूदी लुखुं ल साजिश रचि अर सौं खै कि जब तक उ पौलुस तैं जान से नि मारि दयूला तब तक उ कुछ नि खाला अर न कुछ प्याला।
13
जौं ल या सौं खै उ चालिस से भि जादा लोग छा।
14
ऊंल प्रधान याजक अर दाना-सयाणों मा ऐ के बोलि, “हमारी सौं खै च कि जब तक हम पौलुस तैं मारि नि दयूला, तब तक हम कुछ भि नि खौला।
15
इलै अब तुम अर महासभा मिली के पलटण का सेनापति तैं समझावा, कि पौलुस तैं तुम मा लौनु माना कि तुम वेका बारा मा ठिक-ठिक जांच-पड़ताल कन चंदींनि हम वेका पौंछण से पैली ही बट्टा मा पौलुस तैं मरूणु कु तैयार राला।”
16
पर जब पौलुस का भंणजा ल सूंणि कि यहूदी लोग पौलुस तैं मरणै की योजना बनांणा च, त किला मा जै के पौलुस तैं संदेश दींनि।
17
पौलुस ल सुबदारों मा बट्टी एक तैं अफ म बुलै के बोलि, “यु जवान तैं पलटण का सेनापति मा लिजा यु वे बट्टी कुछ बुल्ण चांणु च।”
18
इलै सुबदार पौलुस का भणजा तैं सिपैयूं का झुण्ड का सेनापति का संमणी लिजै के बोलि, “बंधि पौलुस ल मि तैं बुलै के पूछि कि, यु जवान आदिम तैं त्वे मा लौ किलैकि उ त्वे बट्टी कुछ बुल्ण चांणु च।”
19
पलटण का सेनापति ल वेको हथ पकड़ी अर अलग मा लिजै के वेमा पूछि, “तुम मि बट्टी क्य बुल्ण चांणि छै?”
20
वेल बोलि, “यहूदी अगुवों इन जाल-साझी करीं च कि त्वे बट्टी बिनती कैरी के कि, पौलुस तैं भोल महासभा का बीच मा लै, किलैकि माना उ वेका बारा ठिक-ठिक जांच-पड़ताल कन चांणा छा।
21
पर कृपा कैरी के ऊंकी ईं बिनती का तरपां ध्यान नि द्ये, किलैकि ऊंमा बट्टी चालिस से भि जादा आदिम पौलुस तैं मरणै ताक मा छिनी जौं का कि इन सौं खयां छिन कि जब तक उ पौलुस तैं जान से नि मारि दयूला तब तक हम कुछ भि नि खौला-प्यूला अर तेरु जवाब को इन्तजार कना छिनी।”
22
तब पलटण का सेनापति ल वे जवान तैं इन समझै के भेजि दींनि, “कै मा नि बोलि कि तिल मि तैं यु बात बतै।”
23
तब सेनापति ल सुबदारों मा बट्टी द्वी लुखुं तैं बुलै के बोलि, “आज राती नौं बजि तक कैसरिया शहर जांणु कु द्वी सौ सिपै, सत्तर घुड़सवार अर द्वी सौ भाला वला तैयार रखिनि।
24
अर पौलुस की सवारी कु घोड़ा तैयार रखा कि वे तैं फेलिक्स राज्यपाल मा सूखी शान्ति बचै के पौंछये जौं।”
25
फिर वेल इन्दरी छिट्टी भि लिखीं;
26
महाप्रतापी फेलिक्स राज्यपाल को क्लौदियुस लूसियास की तरपां बट्टी प्रणाम लिखणु छो।
27
यहूदियों यु आदिम तैं पकड़ी के मरण वला छा, पर जब मि तैं मालुम हवे कि यु रोमी च, तब पलटण का द्वारा छुड़ै के वे तैं लै के औं।
28
अर इन जनणु कु, कि उ वे पर भंगार किलै लगांणा छिनी, मि पौलुस तैं ऊंकी महासभा मा ली ग्यों।
29
तब मि तैं मालुम हवे गै, कि उ ऊंका यहूदी व्यवस्था कि बातों का बारा मा वे पर भंगार लगांणा छिनी, पर मरै जांण या बंधे जांण लैक वे पर कुई भि भंगार नि च।
30
अर अब मि तैं बतैये गै, कि उ यु आदिम तैं मरण चांणा छिनी, इलै मिल वे तुरंत त्वे मा भेजि दींनि, अर उन यहूदियों तैं जौला वे पर भंगार लग्युं च आज्ञा दींनि, कि तेरु संमणी वे पर भंगार लगौनु।
31
वीं राती ही सिपैयूं तैं दिये गै आदेशों तैं पूरो कैरी; उ पौलुस तैं यरूशलेम शहर बट्टी ली गैनी अर वे तैं अन्तिपत्रिस शहर मा लैनी।
32
हैंका दिन सिपै घुड़सवरों तैं पौलुस का दगड़ी कैसरिया नगर जांणु कु छोड़ी के अपड़ा किला यरूशलेम शहर कु लौटि गैनी।
33
ऊंल कैसरिया नगर मा पौंछि के राज्यपाल तैं चिट्ठी दींनि; अर पौलुस तैं भि वेका संमणी खड़ो कैरी।
34
राज्यपाल ल पैढ़ी के पूछि, “तू कै प्रदेश को च अर जब वे तैं पता लगि कि यु किलिकिया प्रदेश को च?”
35
तब वेको बोलि, “जब तेरु दुश्मन भि आला, त मि तेरु मुकदमा करुलु।” अर वेल पौलुस तैं राजा हेरोदेस का किला मा, पहरा मा रखणै की आज्ञा दींनि।
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