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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 26
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
राजा अग्रिप्पा ल पौलुस मा बोलि, “त्वे तैं अपड़ा बचाव मा बुनै कि पूरी छूट च” तब पौलुस ल अपड़ो हथ उठै के बुल्ण शुरू कैरी,
2
“हे राजा अग्रिप्पा जथग बातों को यहूदी अगुवा मि पर भंगार लगांणा छिनी, तेरु संमणी ऊं बातों को जवाब दींणु कु मि अफ तैं धन्य समझणु छौं।”
3
खास कैरी के इलै कि तु यहूदियों का रीति-रिवाजों तैं अर जौं बातों पर यहूदी लोग बहस करदींनि तु ऊं बातों तैं जंणदी छै, इलै मि बिनती करदु। कि सब्र रखि के मेरी बात सूंण।
4
मेरी चाल-चलण ज्वनी बट्टी अभि तक कन रै, अर मिल अपड़ा जीवन की शुरू बट्टी अपड़ी जातिवलों का दगड़ी अर यरूशलेम शहर मा कन छो जै तैं सभि यहूदी जणदींनि।
5
उ मेरा बारा मा भौत पैली बट्टी जणदींनि अर जु चाह त ईं बात की गव्है भि दे सकदींनि, कि मिल अपड़ा धर्म का सबसे पक्का रस्ता का अनुसार फरीसी का जन रै करे के जीवन बसर कैरी।
6
पर अब मेरू न्याय हूंणु च, किलैकि मि वीं करार तैं पूरा हूंण पर आस रखदो, ज्वा पिता परमेश्वर ल हमारा बाप-दादाओं दगड़ी कैरी छै।
7
ईं करार तैं पूरी हूंणै आस लगयां हमारा बारह गोत्र अपड़ा सैरा मन से रात दिन पिता परमेश्वर कि आराधना करदी ऐनी। हे राजा यु यहूदी वे ही आशा का कारण मि पर भंगार लगौंदींनि।
8
तब पौलुस ल भीड़ मा सभि यहूदियों बट्टी बोलि, “तुम लोग विश्वास करदा कि पिता परमेश्वर मुरयां लुखुं तैं फिर से ज्यूँदो कैरी सकद, त फिर तुम लोग ईं बात पर विश्वास कन से इंकार किलै करदा कि वेल यीशु तैं मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो कैरी?
9
मिल तैं खुद भि विश्वास च, कि नासरत गौ का यीशु नौं का खिलाफ मा मि तैं भौत कुछ कन चयणु च।
10
अर मिल यरूशलेम शहर मा इन कैरी भि च; अर प्रधान याजक बट्टी अधिकार पै के भौत सैरा भक्त लुखुं तैं जेल भितर डाली अर जब उ मरै जांदा छा, त मि भि वे काम मा राजी छो।
11
हरेक यहूदियों का मिलणा का भवन मा, मि ऊं तैं दंड़ित कैरी के मजबूर करदो छो कि यीशु कि बुरै कैरा। इख तक कि गुस्सा मा मि इथग पागल हवे गै छो कि दुसरा शहरों मा जै के भि ऊं तैं सतौंदू छो।
12
ईं धुन मा मि एक प्रधान याजकों बट्टी अधिकार अर आज्ञा पै के दमिश्क शहर जनै जांणु छो।
13
त हे राजा बट्टा मा दोफरा का बगत पर मिल स्वर्ग बट्टी सूरज का उज्यला बट्टी भि तेज उज्यलो अपड़ा अर अफ दगड़ी जांण वलो का चौतरफी चमकद देखि।
14
हम सभि धरती पर पोड़ी ग्यां त मिल इब्रानी भाषा मा एक आवाज तैं इन बुल्द सूंणि कि, ‘शाऊल हे शाऊल, तू मि तैं दुःख किलै दींणि छै? कील की नौक पर लथि मरण त्वे कु सौंगु नि च’
15
मिल बोलि, ‘हे प्रभु तु कु छै?’ प्रभु ल बोलि, ‘मि यीशु छौं जै तैं तु सतौंणी छै।
16
पर उठ अपड़ा खुट्टों पर खड़ो हवे जा। मिल त्वे तैं दर्शन इलै दींनि कि त्वे तैं अपड़ो सेवक अर अपड़ी बातों को जु तिल दिखिनि अर दिखौलु वेको गवाह बणौ।
17
त्वे तैं यहूदी लुखुं अर अन्यजाति मा भिजणु छौं अर ऊं बट्टी त्वे तैं मि छुड़ौलु,
18
कि तू ऊंकी आंखा खोल, कि उ अंधेरा बट्टी उज्यला का तरपां, अर शैतान का अधिकार बट्टी पिता परमेश्वर की तरपां फिर; त पिता परमेश्वर ऊंका पापों तैं माफ करलो, अर ऊं लुखुं दगड़ी विरासत मिलो, जु मि पर विश्वास कन से पवित्र किये गैनी’
19
इलै हे राजा अग्रिप्पा, मिल वे स्वर्गीय दर्शन को बुल्युं नि टाली।
20
अर पैली दमिश्क का अर फिर यरूशलेम शहर का रौंण वलो अर तब पूरा यहूदिया प्रान्त मा अर अन्यजाति तैं समझाणु रयूं कि उ मन फिरावा अर पिता परमेश्वर मा ऐ के मन फिरौंण का लैख काम कैरा।
21
यूं बातों कि वजह से यहूदियों ल यरूशलेम शहर का मन्दिर मा, मि तैं पकड़वै अर मि तैं मरणै की कोशिश कैरी।
22
पर पिता परमेश्वर कि दया ल मि आज का दिन तक ज्यूँदो छौं अर छुटा-बड़ा सभियूं का संमणी गव्है दींणु छौं। परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो ल अर मूसा द्वारा लिखीं परमेश्वर की व्यवस्था ल जूं-जूं हूंण वली बातों का बारा मा बतै ऊं बातों का अलावा मि कुछ नि बुल्दो,
23
कि मसीह तैं दुःख उठांण पुड़लो, अर उ ही सबसे पैली मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो हवे के, यहूदियों अर अन्यजातियों का बीच मा यु प्रचार कनु कु कि उ बचि सकदींनि, जु की उज्यला का जन छिनी।”
24
जब पौलुस ईं रीति से जवाब दींणु छो तब फेस्तुस ल चिल्लै के बोलि, “पौलुस तु पागल छै, जादा विद्या ल त्वे तैं पागल कैरेले।”
25
पौलुस ल बोलि, “महाप्रतापी फेस्तुस मि पागल नि छौं बल्कि सचो अर समझदार छौं।
26
राजा भि यूं बातों तैं जंणदो छो, इलै मि वेका संमणी निडर हवे के बुल्णु छौं। अर मि तैं विश्वास च, कि यूं बातों बट्टी ल कुई बात राजा बट्टी छिपी नि च, किलैकि या बात चुपचाप बट्टी नि हवे।
27
हे राजा अग्रिप्पा क्य तु परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो कि बात पर विश्वास करदी छै? हां मि जंणदु छौं कि तु विश्वास करदी छै।”
28
तब अग्रिप्पा ल पौलुस मा बोलि, “क्य तु मि तैं थोड़ा सी बगत मा मसीही बनौण चांणि छै?”
29
पौलुस ल बोलि, “पिता परमेश्वर ल मेरी या प्रार्थना च कि, क्य थोड़ा मा या भौत मा बगत मा भस तु ही न बल्कि जथग भि लोग मेरी बात सुनणा छिनी उ सभि सिवाय यूं संगलों का मि जन मसीह विश्वासी बंणि जां।”
30
तब राजा अग्रिप्पा अर राज्यपाल फेस्तुस अर वेकी छुटी भुल्ली बिरनीके अर ऊं दगड़ी बैठण वला लोग सभि खड़ा हवे गैनी अर चलि गैनी।
31
जब उ भैर जांणा छा, उ एक दुसरा बट्टी बुल्ण लगि गैनी, “यु आदिम ल मृत्यु दण्ड या जेल जांणा का योग्य कुई अपराध नि कैरी।”
32
राजा अग्रिप्पा ल फेस्तुस राज्यपाल कु बोलि, “जु यु आदिम ल यु मांग नि कैरी हूंदी कि कैसर वेको न्याय कैरो, त छुटी सकदो छो।”
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