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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 5
Acts 5
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
हनन्याह नौं का एक आदिम अर वेकी घरवलि सफीरा ल अपड़ी सम्पति कु एक भाग बेचि।
2
हनन्याह ल वेका दाम मा बट्टी कुछ आप कु रख छोड़ी अर ईं बात तैं वेकी जनन भि जंणदी छै अर एक हिस्सा लैके ऊं प्रेरितों तैं दे दींनि।
3
पर पतरस ल बोलि, “हे हनन्याह किलै शैतान तैं तिल मौका द्ये कि उ तेरु दिल मा पवित्र आत्मा बट्टी झूठ बुल्णों को विचार डालो। किलै तिल वेकी बात सूंणि अर तिल अपड़ी बिकीं भूमि को एक भाग अफ कु रखि द्ये”
4
क्य बिकै जांण का बाद उ भूमि तेरी नि छै? अर जब बिकी गै त वेको दाम क्य तेरु वश मा नि छो? तेरु मन मा इन बुरा कामों कु विचार किलै ऐ? तिल मनिख्युं मा न बल्कि परमेश्वर बट्टी झूठ बोलि।
5
यूं बातों तैं सुंणदा ही हनन्याह भूमि मा भुयां लमडी, अर वेकी मौत हवे गै अर सब सुनण वलो पर बड़ो डौर छै गै।
6
फिर कुछ जवानों ल ऐ के वेकी लांश तैं कपड़ा मा लपेटी के अर भैर लिजै के खडै दींनि।
7
लगभग तीन घंटा बाद वेकी घरवलि जु कुछ हवे छो नि जांणि के भितर ऐ।
8
तब पतरस ल वीं मा बोलि, “क्य तुम द्वीयूँ ल भूमि तैं इथग मा ही बेचि छो” वीं ल बोलि “हाँ इथग मा ही बेचि।”
9
पतरस ल वीं मा बोलि, “या क्य बात च कि तुम दुयूं ल प्रभु कि आत्मा कि अजमैश कु एक मनसा कैरी? देख तेरु आदिम का दफनौंण वला द्वार पर ही खड़ा छिन अर अब उ त्वे तैं भि भैर ली जाला।”
10
तब व तुरंत भूमि पर लमडी गै, उ मोरि गै अर जवानों ल भितर ऐ कि वे तैं मुर्युं पै अर भैर लिजै के वीं का आदिम का संमणी दफनै दींनि।
11
अर सैरी मण्डलि जु यरूशलेम शहर मा छै, यूं बातों का सब सुनण वलो पर भौत डौर छै।
12
प्रेरितों का द्वारा भौत चिन्ह अर चमत्कार का काम लुखुं का बीच मा दिखै जांदा छा अर मसीह का विश्वासी सब एक चित हवे कै राजा सुलैमान का चौका मा कट्ठा हूंद छा।
13
जौं ल अब तक यीशु पर विश्वास नि कैरी छो कै तैं यु साहस नि हूंद छो कि ऊं दगड़ी मिली जौंन तब भि लोग ऊं की बड़ै करदां छा।
14
प्रभु मा विश्वास कन वला की गिनती बढ़दी गै।
15
प्रेरित जु कुछ कना छा वेका ऊं कामों तैं देख लोग बिमारों तैं बट्टा मा लै-लै के खाट पर लिटै दींद छा कि जब पतरस औ, त वेकी छाया ऊंमा बट्टी कै पर पड़ी जौं।
16
अर यरूशलेम शहर का अमणी-संमणी का शहरों बट्टी भि भौत लोग बिमारों तैं अर दुष्टात्माओं का सतायां छा ऊं तैं लै-लै के, प्रेरितों का संमणी कट्ठा हुंदा छा, अर उ सब खूब हुंदा जांदा छा।
17
तब महायाजक अर वेका सब जु सदूकियों का झुण्ड का छा, उ प्रेरितों बट्टी जलन कन लगि गैनी।
18
अर महायाजक अर सदूकियों ल प्रेरितों तैं गिरफ्तार कैरी कै जेलखना मा बंद कैरी दींनि।
19
पर राती प्रभु का एक स्वर्गदूत ल जेलखना का द्वार खोलि के ऊं तैं भैर लै के ऊंमा बोलि
20
“जावा यरूशलेम शहर का मन्दिर मा खड़ा लुखुं तैं यु नया अनन्त जीवन का बारा मा बतावा।”
21
प्रेरित बड़ी सुबेर मा उठि के यरूशलेम शहर का मन्दिर मा गै जन ऊं तैं स्वर्गदूत ल बतै छो अर शिक्षा दींण शुरू कैरी। फिर जब महायाजक अर वेका दगड़िया उख पौछिनी त ऊंल यहूदी झुण्ड अर इस्राएल का दाना सयाणों की पूरी महासभा बुलै अर जेलखना कु रैबार भेजि कि ऊं प्रेरितों तैं इख लौनु।
22
पर मन्दिर का रखवलों ल उख पौंछि कै ऊं तैं जेलखना मा नि पै अर लौटि के बतै
23
“हम ल जेलखना बड़ी चौकसी ल बंद करयूं देखि अर पैैरादारों तैं भैर फाटक पर खड़ो होंयुं देखि पर जब जेलखना तैं खोलि त भितर कुई नि छो।”
24
जब यरूशलेम शहर का मन्दिर का रखवलों का सरदार अर प्रधान याजक ल या बात सूंणि त ऊं चेलों का बारा मा भौत चिंता मा पड़ी गैनी कि यांको क्य परिणाम होलो
25
इथग मा कैन ऐ के ऊं तैं बतै “देखा जौं तैं तुम ल जेलखना मा बंद कैरी छो उ यरूशलेम शहर का मन्दिर मा खड़ा हवे के लुखुं तैं उपदेश दींण छिन।”
26
जब ऊंल यु सूंणि, तब मन्दिर का रखवलों का सरदार का दगड़ी मन्दिर मा गैनी, अधिकारियों का दगड़ी जै कै, प्रेरितों तैं महासभा का संमणी लै ऐनी, पर जोर जबरदस्ती ल न उ लुखुं बट्टी डरदा छा कि लोग ढुंग्यो मार-मारि के ऊं की हत्या कैरी दयाला।
27
ऊंल प्रेरितों तैं फिर लै के महासभा का संमणी खड़ो कैरी दींनि तब महायाजक ल ऊंमा पूछि,
28
“क्य हम ल तुम तैं चितै के आज्ञा नि दे छै कि यीशु का नौं से उपदेश नि दियां? तब भि देखा तुम ल सैरा यरूशलेम शहर तैं अपड़ा उपदेश से भोरियाली अर तुम यु मनिख कि ल्वे कु भंगार जबरदस्ती हम पर लगौंण चांणा छा।”
29
तब पतरस अर बकि प्रेरितों ल जवाब दींनि “मनिख्युं कि आज्ञा से बढ़ि के परमेश्वर कि आज्ञा को पालन कन हमारो फर्ज च।
30
हमारा पूर्वजों का पिता परमेश्वर ल यीशु तैं मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो कैरी द्ये जै तैं तुम ल सूली पर लटकै के मारि डाली छो।
31
वे तैं ही पिता परमेश्वर ल प्रभु अर उद्धारकर्ता का रूप मा अपड़ा दैंणा हथ का तरपां सर्वश्रेष्ठ जगह मा ऊंचो कैरी कि उ इस्राएलियों तैं अपड़ा बुरी सोच विचार अर बट्टों बट्टी पिता परमेश्वर की तरपां मुड़ा अर वेका द्वारा अपड़ा पापों की माफी पां।
32
हम यूं बातों का गवाह छा अर उन ही पवित्र आत्मा भि जु परमेश्वर ल ऊं तैं दियुं च जु वेकी आज्ञा मणदींनि।”
33
जब महासभा का सदस्यों ल यु सूंणि त उ भौत गुस्सा हवे गैनी, अर प्रेरितों तैं मरण चांदा छा।
34
पर गमलीएल नौं को एक फरीसी अर मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वलो अर सब लुखुं मा जंणयूं-मंणयूं छो वेल महासभा मा खड़ो हवे के चेलों तैं जरा देरो कु भैर लिजांणै आज्ञा दे दींनि।
35
तब वेल महासभा का सदस्यों मा बोलि, “हे इस्राएलियों तुम यूं मनिख्युं का दगड़ा मा जु कुछ भि कना छा सोचि समझी के करयां।
36
किलैकि यूं दिनों से पैली थियूदास यु बोलि के प्रगट हवे, लुखुं तैं बतै की उ एक महान आदिम च अर लगभग चार सौ लोग वे दगड़ी हवे गैनी पर उ मरै गै अर जथग लोग वे तैं मंणदा छा सब तितर-बितर हवीनि अर हरचि गैनी।
37
वांका बाद जनगणना का दिनों मा गलील वासी यहूदा ऐ, अर कुछ लुखुं तैं अपड़ी अर कैरी द्ये उ भि मरै गै, अर जथग लोग वे तैं मनणवला छा उ भि तितर-बितर हवे गैनी।
38
इलै मि अब तुम मा बुल्णु छौं इंदरा लुखुं बट्टी दूर रावा अर यूं बट्टी कुछ भि काम नि रखा किलैकि जु यु योजना या काम मनिख्युं कि तरपां बट्टी होलो त मिट जालो
39
पर जु परमेश्वर कि तरपां बट्टी च त तुम ऊं तैं कभि नि मिटै सकिल्या। कखि इन नि हो कि तुम परमेश्वर दगड़ी भि लड़णा वला ठैरा।”
40
तब ऊंल वेकी बात मांणी अर प्रेरितों तैं बुलै के पिटवै अर ऊं यु आज्ञा दे कि उ अब बट्टी यीशु का नौं मा कुछ नि बोलि अर फिर ऊं तैं मुक्त कैरी द्ये।
41
प्रेरित ईं बात से खुश हवे के महासभा का संमणी बट्टी चलि गैनी की उ यीशु की खातिर निरादर हूंण का लैक त ठैरयां।
42
यांका बाद हरेक दिन, यरूशलेम शहर का मन्दिर मा अर घौर-घौर मा, प्रेरित हर बगत सिखांण अर शुभ सन्देश प्रचार करदा छा कि यीशु ही मसीह च।
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