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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Acts 21
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
यांका बाद हम ल इफिसुस शहर का पुरणों तैं विदा कैरी के सीधा रस्ता बट्टी कोस द्वीप का तरपां समुद्री यात्रा तैं शुरू कैरी। अर हैंका दिन हम रुदुस द्वीप अर उख बट्टी पतरा शहर अयां।
2
अर एक जहाज फीनीके प्रदेश कु जांदु मिली, अर हम ल वेमा चैढी कै, यात्रा शुरू कैरी।
3
हम तैं बैं तरपां साइप्रस द्वीप दिखै द्ये। हम उख बट्टी हवे कैरी के सीरिया प्रदेश की तरपां बढ़दी रां अर सूर शहर तक पौंछि ग्यां, किलैकि उख जहाज बट्टी समान उतरै जांण छो।
4
उख हम ल ढूंडी अर कुछ चेला हम तैं मिलिनि, अर हम उख सात दिन तक रैयां। तब ऊंल पवित्र आत्मा का आज्ञा पर पौलुस बट्टी यरूशलेम शहर नि जांणै की बिनती कैरी।
5
सात दिन का बाद जब उख बट्टी हमारो जांणो को बगत ऐ, जब हम उख बट्टी जांण छा। तब उ सभि जनन अर बच्चों समेत हम दगड़ी शहर बट्टी भैर गैनी, अर हम ल छाला पर घुंडा टेकी के पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कैरी।
6
तब एक हैंका बट्टी विदा हवे के हम त जहाज मा बैठी ग्यां, अर उ सभि अपड़ा-अपड़ा घौर कु लौटि गैनी।
7
सूर शहर बट्टी शुरू किये गै यात्रा पूरी कैरी के हम पतुलिमयिस नगर पौंछयां, अर विश्वासी भयों बट्टी मुलाकात कैरी के उख ऊं दगड़ी एक दिन तक रयां।
8
दुसरा दिन हम उख बट्टी चलि के कैसरिया शहर मा पौंछि, अर फिलिप्पुस सुसमाचार प्रचारक का घौर मा उ, ऊं सात आदिमों मा बट्टी एक छो, जौं तैं यरूशलेम शहर मा प्रेरितों ल विधवाओं की देखभाल कु चुणयूं छो, जै के वेका यख रै।
9
वेकी चार कुँवारी नौंनि छै; जु परमेश्वर की तरपां बट्टी बुल्दी छै।
10
जब हम उख भौत दिन तक रयां, त अगबुस नौं को एक परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वला यहूदिया प्रान्त बट्टी ऐ।
11
वेल हम मा ऐ के पौलुस को पठुको लींनि, अर अपड़ा हथ खुट्टा बंधि के बोलि, “पवित्र आत्मा इन बुल्णु च, कि जै आदिम को यु पठुका च, वे तैं यरूशलेम शहर मा यहूदी इन ही कै बंधला, अर अन्यजाति लुखुं का सुपुर्द कैरी द्याला।”
12
जब हम ल यु बात सूंणि त, हम ल अर उख रांण वला लुखुं ल पौलुस बट्टी बिनती कैरी, कि यरूशलेम शहर मा नि जा।
13
पर पौलुस ल बोलि, “तुम कन छा, कि रौवे-रौवे के मेरू दिल किलै दुखांणा छा? मि प्रभु यीशु का नौं कु न भस यरूशलेम शहर मा बंधे जांणु कु बल्कि मुरण कु भि तैयार छौं।”
14
पर जब वेल हमारी बात नि मांणी त, हम इन बोलि के चुप हवे ग्यां कि, “प्रभु की मनसा पूरी हो।”
15
कुछ दिनों का बाद हम ल तैयारी कैरी, अर यरूशलेम शहर जनै चलि ग्यां।
16
कैसरिया नगर का भि कुछ चेला हम दगड़ी हवे गैनी, अर मनासोन नौं को साइप्रस द्वीप का रौंण वला का घौर लिजये गै। उ सभि शिष्यों मा बट्टी एक छो।
17
जब हम यरूशलेम शहर मा पौंछि गै, तब विश्वासी भयों ल बड़ो आनन्द का दगड़ी हमारो स्वागत कैरी।
18
हैंका दिन पौलुस हम तैं ले के याकूब मा गै, जख मण्डलि का सब पुरणा अगुवा कट्ठा हुयां छा।
19
तब पौलुस ल ऊं तैं प्रणाम कैरी के, जु-जु काम परमेश्वर ल वेकी सेवा का द्वारा अन्यजातियों मा कैरी छा, उ सब एक-एक कैरी के सभि बतै दींनि।
20
ऊं बातों तैं सूंणि के ऊं सभियूं ल परमेश्वर की बढ़ै कैरी, फिर ऊंल पौलुस कु बोलि, “हे भयों, तु जंणदी छै कि यहूदियों मा बट्टी कई हजारों ल विश्वास कैरी; अर उ सभि मूसा की व्यवस्था को पालन विश्वासयोग्यता बट्टी करदा छा।
21
अर उन यहूदी विश्वासियों ल तेरु बारा मा ऊं तैं दूसरों का द्वारा बतै गै, कि तु अन्यजाति का बीच मा रांण वला यहूदियों तैं मूसा की व्यवस्था तैं छोड़ी दींण सिखांदी, अर बुल्णी छै, कि अपड़ा बच्चों को खतना करावा अर न यहूदी रीति-रिवाजों पर चला।
22
त फिर क्य करे जौं? लुखुं ल जरूर सुनण कि तु इख ऐ छै।
23
इलै जन हम त्वे कु बुल्णा छा, तु उन ही कैर। हमारा इख चार आदिम छिनी, ऊंल व मन्नत पूरी कन जु ऊंल परमेश्वर का संमणी मणी च।
24
ऊं तैं लिजै के ऊं दगड़ी तु अफ तैं भि शुद्ध कनै की विधि पूरी कैर; अर ऊंकु खर्च दे, कि उ अपड़ा मुंड मुंड़ौनु। तब सभि लोग जांणि जाला, कि जु बात ऊंल तेरु बारा मा सुणये गै, कि ऊंकी कुई जड़ नि च पर तु अफ भि मूसा की व्यवस्था तैं मांणी के वेका अनुसार चलदी छै।
25
अर ऊं अन्यजाति का लुखुं का बारा मा जौं ल विश्वास कैरी, ऊंकु हम ल यु फैसला कैरी अर लिखीं के भेजि कि ऊं मूरतों का संमणी बलि चढ़ैईं मांस बट्टी, अर ल्वे से अर गोला घोंटी के मांस बट्टी, अर व्यभिचार बट्टी, दूर रैयां।”
26
दुसरा दिन पौलुस ल ऊं मनिख्युं का दगड़ी जै के अफ तैं शुद्ध कैरी, तब उ यरूशलेम शहर का मन्दिर गैनी, अर यु प्रचार कैरी की शुद्ध हूंणा का दिन कब खत्म होला, अर ऊंमा बट्टी हरेक कु बलिदान चढ़ै जाली।
27
जब सात दिन पूरा हूंण वला छा, त एशिया प्रान्त का यहूदियों ल पौलुस तैं यरूशलेम शहर का मन्दिर मा देखि के ऊंल सैरी भीड़ तैं भड़कै अर पौलुस तैं पकड़ी दींनि अर चिल्लांण लगि गैनी,
28
“हे इस्राएलियों हमारी मदद कैरा। किलैकि यु उ ही आदिम च जु सभि जगह हमारा लुखुं का खिलाफ मा तैं अर व्यवस्था का खिलाफ मा अर ईं जगह का विरोध मा सिखाणु च, इख तक कि अन्यजाति (यूनानियों) तैं भि यरूशलेम शहर का मन्दिर मा लै के वेल यु पवित्र जगह तैं अपवित्र कैरी।”
29
ऊंल इन बोलि, किलैकि यां बट्टी पैली इफिसुस वासी त्रुफिमुस तैं पौलुस दगड़ी शहर मा देखि छो, इलै ऊंल इन समझी कि पौलुस वे तैं यरूशलेम शहर का मन्दिर मा लै गै।
30
तब सैरा नगर मा घपरौल मचि गै, अर लोग दौड़ि-दौड़ि के कट्ठा हवे गैनी, अर तैं पकड़ी के पौलुस तैं यरूशलेम शहर का मन्दिर का भैर घसीट लैनी, अर झट कैरी के द्वार बंद कैरी दींनि।
31
जब उ वे तैं मरण चांणा छा, त रोमी पलटण का सेनापति मा खबर पौंछि कि यरूशलेम शहर मा भौत सैरा लुखुं मा घपरौल मचणु च।
32
तब उ झट कैरी के अपड़ा सिपैयूं दगड़ी उख गै अर सुबदारों तैं ले के वेमा दौड़ि ऐ; अर लुखुं की भीड़ सिपैयूं का झुण्ड का सरदार तैं अर सिपैयूं तैं देखि के पौलुस तैं मरण पिटण बंद कैरी दींनि।
33
तब पलटण का सेनापति ल पौलुस का नजदीक ऐ के वे तैं गिरफ्तार कैरी के द्वी संगलों बट्टी बंधि के भीड़ तैं पुछण लगि गै; “यु आदिम कु च, अर येल क्य कैरी?”
34
पर भीड़ मा बट्टी लोग अलग-अलग बात कन लगि गैनी अर जब हला कि वजह ल उ असली बात नि जांणि सकिनि, त वेल पौलुस तैं किला का भितर लिजांणै कि आज्ञा दींनि।
35
जब उ सीड़ियूं मा पौंछिनी, त तब भीड़ इथग भड़की गै छै कि सिपै पौलुस तैं किला का भितर उठै लिजांण पोड़ी।
36
किलैकि लुखुं कि भीड़ इन चिल्लांणी छै, वेका पीछेने पोड़ी, “वे तैं मारि द्या।”
37
जब उ पौलुस तैं किला का भितर लिजांण वला छा, त वेल पलटण का सेनापति कु बोलि, “क्य मि त्वे बट्टी कुछ बोलि सकदु” पलटण का सेनापति ल बोलि, “क्य तु यूनानी भाषा जंणदी छै?”
38
“क्य तु मिस्री नि छै?, जु कुछ बगत पैली सरकार का खिलाफ विद्रोह कैरी, चार हजार हथियारबंद लुखुं तैं एकांत जंगल मा ली गै छो?”
39
अर पौलुस ल बोलि, “न, मि एक यहूदी छों, मि किलिकिया प्रदेश का तरसुस नगर को निवासी छों, जु एक मुख्य शहर च, अर मि त्वे बट्टी बिनती करदो छों, कि मि तैं लुखुं दगड़ी बात कन दे।”
40
जब वेल आज्ञा दींनि, त पौलुस ल सीड़ियूं मा खड़ो हवे के लुखुं तैं चुप रौंण कु सनकै। जब उ चुप हवे गैनी, त उ इब्रानी भाषा मा बुल्ण लगि गै।
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